लखनऊ (जेएनएन)। राज्यसभा चुनाव में मतगणना शुक्रवार शाम पांच बजे शुरू होनी थी लेकिन, निर्वाचन आयोग की अनुमति मिलने में देरी हुई। शिकायत की वजह से करीब दो घंटे बाद मतगणना शुरू हो सकी। यह शिकायत सपा, बसपा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की ओर से की गई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि उनकी पार्टी के विधायकों ने बिना दिखाये वोट मतपेटिका में डाल दी। यह प्रावधान है कि विधायक अपने मताधिकार का प्रयोग करने के बाद पार्टी एजेंट को मतपत्र दिखा कर ही मतपेटिका में डालते हैं।

बसपा दल के नेता लालजी वर्मा पार्टी के एजेंट थे। उनका आरोप था कि अनिल सिंह ने बिना उन्हें मत दिखाए मतपेटिका में डाल दिया। माना जा रहा है कि बसपा विधायक अनिल सिंह ने भाजपा उम्मीदवार को मत दिया। मतदान के बाद अनिल सिंह ने बाहर आकर दावा किया कि उन्होंने अपना मत दल नेता लालजी वर्मा को दिखाकर ही मतपेटिका में डाला है। आयोग ने इसकी वीडियो फुटेज मंगा कर देखी।

वहीं, समाजवादी पार्टी ने नितिन अग्रवाल के खिलाफ इसी तरह का आरोप लगाया। सपा के एजेंट ने नितिन अग्रवाल पर बिना वोट दिखाए मतपेटिका में डालने का आरोप लगाया है। नितिन अपने पिता नरेश अग्रवाल के साथ कुछ दिन पहले ही भाजपा में शामिल हो गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर दो दिनों तक चले मॉक पोलिंग में नितिन अग्रवाल शामिल हुए और उन्होंने खुलकर भाजपा के पक्ष में वोट देने का एलान किया। तीसरा मामला सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के सदस्य कैलाश सोनकर को लेकर है। कैलाश सोनकर पहली बार वोट डालने पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने अपने एजेंट को दिखाया तो उन्होंने उनका बैलेट फाड़ दिया। इसके बाद कैलाश सोनकर ने दूसरे पर मतदान किया, लेकिन उन्होंने अपना मत दिखाया नहीं। भासपा की ओर से शिकायत की गई बिना दिखाए सोनकर ने वोट डाला है। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए आयोग ने कई बिंदुओं पर जवाब तलब किया और संतुष्ट होने के बाद शिकायतों को खारिज कर मतगणना शुरू करने की इजाजत दे दी। इस प्रक्रिया में दो घंटे लग गए और करीब सात बजे शाम से मतगणना शुरू हो सकी। कहा जा रहा है कि कैलाश सोनकर ने भी आयोग से मतपत्र फाडऩे की शिकायत की है।

Posted By: Nawal Mishra