लखनऊ, जेएनएन। कोरोना संकट के कारण हुए लॉकडाउन में 181 महिला हेल्पलाइन भी लॉक हो गई है। दस माह से वेतन न मिलने से 181 महिला हेल्पलाइन पहले ही हिचकोले खाकर चल रही थी। इसके बावजूद वेतन मिलने की आस में महिला काउंसलर कॉल सेंटर चला रही थीं। बजट के अभाव में ऑफिस की गाड़ियां बंद होने पर भी महिलाएं अपने संसाधनों से ऑफिस आ रहीं थीं। अब लॉकडाउन हुआ तो यूपी सरकार ने वाहन मुहैया नहीं कराए, जबकि महिलाएं अपने वाहनों से भी इस समय ऑफिस नहीं आ पा रही हैं। इससे फिलहाल इस महत्वपूर्ण कॉल सेंटर पर ताला लग गया है।

दरअसल, यूपी में पूर्व की समाजवादी पार्टी की सरकार ने महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों से उन्हें बचाने के लिए छह सीटर 181 महिला हेल्पलाइन का कॉल सेंटर शुरू किया था। कॉल सेंटर की उपयोगिता देख योगी सरकार ने इस सेवा का विस्तार कर कॉल सेंटर को 30 सीटर कर दिया। साथ ही सभी 75 जिलों में रेस्क्यू वैन सेवा शुरू कर दी। शुरुआत से कॉल सेंटर संचालन का जिम्मा 108 एवं 102 एंबुलेंस चलाने वाली जीवीके-इएमआरआइ कंपनी को दिया गया। कॉल सेंटर में हर दिन 400 से 500 पीड़ित महिलाओं की कॉल आती थीं लेकिन, अच्छी खासी सेवा देने वाली यह हेल्पलाइन अब बंद हो गई है।

इसका कारण यह है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में सरकार ने कंपनी को भुगतान ही नहीं किया, जिससे महिला कर्मचारियों को 10 माह से वेतन नहीं मिला है। अब लॉकडाउन में ताला लगने के बावजूद महिला कल्याण विभाग के अफसरों ने इस महत्वपूर्ण कॉल सेंटर की कोई सुध नहीं ली। वहीं, महिला कल्याण निदेशक मनोज कुमार राय कहते हैं कि बहुत जल्द यह मामला हल हो जाएगा। कैबिनेट में प्रस्ताव भेजा गया है, जो पास होने पर महिला काउंसलरों का बकाया वेतन भी मिल जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही 181 महिला हेल्पलाइन सेवा पटरी पर लौट आएगी।

Posted By: Umesh Tiwari

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