अयोध्या[रमाशरण अवस्थी]। श्रीरामजन्मभूमि परिसर में भूमिपूजन के बाद मंदिर निर्माण शुरू होने की प्रतीक्षा शीघ्र पूर्ण होगी। निर्माण से जुड़ी एजेंसी के मुताबिक, इसी माह के अंत तक मंदिर निर्माण शुरू हो जाएगा। निर्माण पर अमल शुरू होने से पूर्व प्रस्तावित मंदिर के नींव की डिजाइन जरूरी है।

मंदिर निर्माण कराने वाली भवन निर्माण के क्षेत्र की शीर्ष कंपनी लार्सन एंड टुब्रो के दिग्गज इंजीनियर नींव डिजाइन फाइनल करने में जुटे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार एक सप्ताह के अंदर डिजाइन फाइनल होगी। तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर की नींव की मजबूती को लेकर बहुत सजग है। जिस नींव पर भव्य, ऐतिहासिक और लाखों टन पत्थरों का भार रखना है और उसे कालजयी भी बनाना है।

तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय शुक्रवार को ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि मंदिर की नींव मजबूती की मिसाल होगी और उसे नदियों के बड़े-बड़े पुलों में ढलने वाले स्तंभ की तरह पुख्ता बनाया जाएगा। तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने निर्माण में प्रयुक्त होने वाले पत्थरों को श्रीरामजन्मभूमि परिसर में लाने की तैयारी भी पूरी कर ली है। अगले 10 दिनों में पत्थरों के आने का क्रम शुरू हो जाएगा।

आकार वृद्धि के साथ ट्रस्ट को बहाना पड़ रहा पसीना

तीन दशक से पत्थर तराशी एवं अन्य तैयारियां प्रस्तावित मंदिर के आकार में वृद्धि की घोषणा से सीमित पड़ गई हैं। 18 जुलाई को आकार में वृद्धि का निर्णय किये जाने के बाद से तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को काफी पसीना बहाना पड़ रहा है। जहां पूर्व प्रस्तावित मंदिर में पौने दो लाख घन फीट पत्थर प्रयुक्त होना था, वहीं आकार वृद्धि के बाद चार लाख घन फीट पत्थर की जरूरत बतायी गई है। ऐसे में न केवल सवा दो लाख टन पत्थर लाने, बल्कि उसे प्रस्तावित मंदिर के अनुरूप ढालने का भी काम होना है।

पूर्व प्रस्तावित मंदिर 

268 फीट लंबा, 140 फीट चौड़ा एवं 128 फीट ऊंचा था। इसमें एक शिखर और दो उप शिखर थे। दो तल के इस मंदिर में प्रत्येक तल पर 106 के हिसाब से 212 स्तंभ प्रयुक्त होने थे।

प्रस्तावित मंदिर  

360 फीट लंबा, 235 फीट चौड़ा एवं 161 फीट ऊंचा है। इसमें एक शिखर और छह उप शिखर हैं। यह तीन तल का है और प्रत्येक तल पर 106 स्तंभ के हिसाब से इसमें 318 स्तंभ हैं।

Posted By: Anurag Gupta

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