कांग्रेस ने एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, पारदर्शी प्रक्रिया की मांग
UPCC: कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मुख्य चुनाव आयुक्त की ...और पढ़ें

कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ और राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे की संयुक्त प्रेस वार्ता
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कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ और राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे की प्रेस वार्ता
कांग्रेस ने दावा किया कि तीन चरणों में हटाए गए 13.98 करोड़ नाम
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ और राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने संयुक्त प्रेस वार्ता में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर कई सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र में नागरिक के मताधिकार का आधार है, इसलिए इसमें बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी और कानून के अनुरूप होनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने मार्च 2023 में उच्चतम न्यायालय के अनूप बरनवाल मामले में दिए फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान पीठ ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और मुख्य न्यायाधीश की समिति की व्यवस्था की थी। हालांकि, दिसंबर 2023 में बने कानून में मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को चयन समिति में शामिल किया गया।
कांग्रेस के अनुसार, फरवरी 2025 में ज्ञानेश कुमार की मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति के समय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने असहमति नोट दर्ज किया था। प्रेस वार्ता में आयोग के भीतर कथित मतभेदों का भी मुद्दा उठाया गया।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि पिछले दस महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने विभिन्न निर्णयों पर कम से कम 14 लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने और सूचना प्रौद्योगिकी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए।
एसआईआर को लेकर कांग्रेस ने दावा किया कि तीन चरणों में 13.98 करोड़ नाम हटाए गए और 5.43 करोड़ मतदाताओं को अतिरिक्त दस्तावेजों के नोटिस दिए गए। फार्म-6 में किए गए बदलाव की वैधानिकता पर भी सवाल उठाते हुए कहा गया कि चुनाव नियमों में संशोधन के बिना नई अनिवार्य शर्तें जोड़ना गंभीर विषय है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत शक्तियां प्राप्त हैं, लेकिन इनका प्रयोग संसद द्वारा बनाए कानूनों और नियमों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता और संस्थागत सहमति सुनिश्चित करने की मांग की।
