प्रयागराज [धर्मेश अवस्थी]। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (यूपीएसईएसएसबी) ने दूसरी बार प्रतियोगियों व तदर्थ शिक्षकों को तगड़ा झटका दिया है। चार माह पहले जीव विज्ञान विषय के पद घोषित न होने से प्रतियोगी निराश थे, जबकि इस बार यह विषय शामिल हुआ तो 310 पदों को घटा दिया गया। तदर्थ शिक्षकों को पहले मूल्यांकन यानी प्रति प्रश्न अंक देने में कमी की गई थी। इस बार उनका वेटेज पांच अंक घटा दिया है। इसके लिए चार महीने लंबी कवायद चली, जिसके बाद आए नए विज्ञापन से प्रतियोगियों का एक वर्ग खुश है तो अधिकांश निराश हैं।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने साढ़े चार हजार से अधिक एडेड माध्यमिक कालेजों में प्रवक्ता व प्रशिक्षित स्नातक भर्ती का विज्ञापन जारी किया है। इसके तहत 15,198 पदों पर चयन के लिए मंगलवार से ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए। चयन बोर्ड ने अक्टूबर में यही भर्ती 15,508 पदों की घोषित की थी। उस समय जीव विज्ञान विषय नहीं था और तदर्थ शिक्षकों का प्रति प्रश्न मूल्यांकन प्रतियोगियों से कम था। यह दोनों कमियां दूर करने के लिए 18 नवंबर, 2020 को विज्ञापन निरस्त हुआ था। अब जीव विज्ञान विषय शामिल हो गया है, लेकिन कुल पदों की संख्या 310 कम हो गई है। तदर्थ शिक्षकों का मूल्यांकन दुरुस्त कर दिया गया है, लेकिन उनका वेटेज पांच अंक घट गया है। उप सचिव का कहना है कि पदों में कमी जिलों से मिले अधियाचन के आधार पर हुई है।

नहीं बदली चयन की अर्हता : विज्ञापन में विषयों की अर्हता नहीं बदली है। शासन ने जीव विज्ञान विषय के तूल पकडऩे पर तीन अफसरों की कमेटी बनाई थी, ताकि वे अर्हता मामलों का निपटारा कर सकें। सबसे अधिक विवाद कला विषय के शिक्षकों की अर्हता को लेकर हैं। कला विषय में बैचलर ऑफ फाइन आट्र्स (बीएफए) या मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स (एमएफए) जैसी उच्च योग्यता को दरकिनार कर इंटर स्तर के डिप्लोमा को प्राथमिकता दी गई है।

लाहौर तक की डिग्री मान्य : टीजीटी कला के लिए राजकीय कला व शिल्प विद्यालय लखनऊ का आर्ट मास्टर्स ट्रेनिंग सर्टिफिकेट या प्राविधिक कला के साथ यूपी बोर्ड से इंटर पास मान्य है। वहीं, कोलकाता की फाइनल ड्राइंग टीचर्सशिप या लाहौर के मेयो स्कूल ऑफ आर्ट्स की टीचर्स सीनियर सर्टिफिकेट परीक्षा या मुंबई की इंटरमीडिएट ग्रेड ड्राइंग परीक्षा या मुंबई की थर्ड ग्रेड आर्ट्स स्कूल परीक्षा मान्य है। प्रवक्ता पद की भर्ती में भी लाहौर का सर्टिफिकेट मान्य है। अर्हता यूपी बोर्ड तय करता है। कुछ माह पहले शासन ने बोर्ड के उन नियमों को हटाने के लिए कमेटी बनाई थी जिनका उपयोग नहीं के बराबर है। इसके बाद भी लाहौर का प्रमाणपत्र मान्य है।

Edited By: Umesh Tiwari