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'साक्ष्य कमजोर तो अपराधी बरी, अब ऐसी चूक बर्दाश्त नहीं', सीएम योगी की अधिकारियों को नसीहत

Published: Thu, 05 Nov 2026 09:51 PM (IST)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवचयनित वैज्ञानिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र देते हुए फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने में कोई चूक न करने की सख्त हिदायत दी।

साक्ष्य कमजोर तो अपराधी बरी, अब ऐसी चूक बर्दाश्त नहीं: सीएम योगी।

साक्ष्य कमजोर तो अपराधी बरी, अब ऐसी चूक बर्दाश्त नहीं: सीएम योगी।

HighLights

  1. फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने में अब कोई चूक बर्दाश्त नहीं होगी।

  2. पुख्ता साक्ष्यों से अपराधी को सजा दिलाना ही सुशासन का लक्ष्य।

  3. नए आपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन अनिवार्य।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने में जरा सी चूक भी अपराधियों को कानून के शिकंजे से बचा सकती है। ऐसे में अब जांच में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को 28 नवचयनित वैज्ञानिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए स्पष्ट कहा कि साक्ष्य इतने पुख्ता, प्रमाणिक और समयबद्ध होने चाहिए कि कोई अपराधी उसका लाभ उठाकर अदालत से बरी न हो सके।

उन्होंने अधिकारियों को नसीहत दी कि जिस निष्पक्षता से उन्हें नौकरी मिली है, उसी ईमानदारी से पीड़ित को न्याय दिलाने में अपनी भूमिका निभाएं। अपराधी को सजा और निर्दोष को सम्मान दिलाना ही सुशासन का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि वैज्ञानिक अधिकारियों की भूमिका केवल घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी प्रमाणिकता बनाए रखना और उन्हें न्यायालय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने योग्य बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

अपराधी को सजा दिलाने और निर्दोष को झूठे आरोपों से बचाने में अब वैज्ञानिक साक्ष्य निर्णायक भूमिका निभाएंगे। नए आपराधिक कानूनों के तहत सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक साक्ष्य जुटाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि फारेंसिक साक्ष्यों की शुद्धता और समयबद्धता ही न्याय की मजबूती तय करेगी।

मुख्यमंत्री ने एक दुर्दांत माफिया का उदाहरण देते हुए कहा कि उसके विरुद्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य होने के बावजूद वह अदालत से बरी हो गया था। एसटीएफ ने साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, लेकिन उन्हें प्रभावी तरीके से स्थापित करने में कमी रह गई। यह व्यवस्था की कमी थी।

उन्होंने भारतीय न्याय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि गौतम ने हजारों वर्ष पहले प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द प्रमाण के चार आधार बताए थे। आज की वैज्ञानिक जांच व्यवस्था में भी इनका महत्व है। न्यायालय में सत्य की विजय के लिए विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जुलाई 2024 में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फारेंसिक साक्ष्य संकलन अनिवार्य किया गया है। इसके लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन की जरूरत थी। प्रदेश में 500 फारेंसिक एविडेंस कलेक्ट करने वाले पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता के मुकाबले 600 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। प्रत्येक जिले में दो-दो फारेंसिक मोबाइल वैन उपलब्ध कराई गई हैं।

नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थापना के साथ आधुनिक जांच सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण आदि उपस्थित थे।

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