लखनऊ, जेएनएन। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को पुलिस स्मृति दिवस पर लखनऊ पुलिस लाइन में शोक परेड की सलामी लेने के साथ पुलिसकर्मियों के साहस तथा शौर्य की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जनता को सुरक्षा का अहसास कराने के साथ अपराधियों में भय व्यापत कराना सरकार की प्राथमिकता है।

पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस वर्ष पांच शहीदों ने पुलिस विभाग के साथ प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। ऐसे शहीदों के लिए हम हमेशा ऋणी रहेंगें। हमारी सरकार शहीद परिवारों के साथ है, उनकी हर संभव मदद करेगी। उन्होंने कहा कि इसस पहले गणतंत्र दिवस पर पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया। सरकार ने अब तक 28, 400 पुलिसकर्मियों को प्रोन्नत किया है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकता ही अपराधियों में कानून का भय व्याप्त कराने के साथ जनता को सुरक्षा का अहसास कराने की है। इसमें हमको पुलिस से बराबर सहयोग मिल रहा है। अब तक सौ से अधिक अपराधियों को एनकाउन्टर में मारा गया है जबकि इससे अधिक संख्या में बड़े अपराधी जेल में बंद हैं। अब जनता में सुरक्षा की भावना व्यापत हुई है।

प्रयागराज कुंभ शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को बधाई दी। महिलाओं की सुरक्षा के लिए एंटी रोमियों बल का गठन किया गया है। गैंगस्टर में 23, 700 वांछित अभियुक्त जेल जा चुके हैं। कानून के भय के चलते ही 16,285 वांछित अपराधी जमानत कैंसिल कराकर जेल जा चुके हैं।

अब यूपी डायल 100 को 112 कर दिया जाएगा। महिलाओं की शिकायतों के लिए अलग से एप तैयार किया गया है। 5,400 महिलायों को मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही यूपी कॉप एप का दो लाख से अधिक लोग लाभ उठा रहे हैं। पुलिस बल जनता की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहेगी। अब प्रदेश में कोई संगठित अपराधी जेल से बाहर नहीं है। 

उल्लेखनीय है कि एक सितंबर, 2018 से 31 अगस्त, 2019 तक की अवधि में पूरे देश में कुल 292 पुलिस जवानों ने जान की आहुति दी है। इसमें उत्तर प्रदेश के भी पांच पुलिसकर्मी शामिल हैं। इसमें सबसे पहला नाम बुलंदशहर में तैनात इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह का है। तीन दिसंबर, 2018 को बुलंदशहर के थाना स्याना क्षेत्र के महाव जंगल में गोकशी की सूचना पर सुबोध कुमार सिंह शांति व्यवस्था के लिए पहुंचे थे। उपद्रव कर रही भीड़ ने सुबोध कुमार सिंह की जान ले ली। 29 दिसंबर 2018 को गाजीपुर के अटवामोड़ बाजार के आगे उपद्रवियों के पथराव में मुख्य आरक्षी सुरेश प्रताप सिंह ने शांति-व्यवस्था के लिए अदम्य साहस का परिचय दिया। गंभीर चोट लगने से उनकी मौत हो गई। 

आरक्षी हर्ष चौधरी ने 27 जनवरी 2019 को अमरोहा में पुलिस टीम के साथ खुंखार अपराधियों को घेरने की पहल की। हर्ष ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए अपराधियों का पीछा किया। बदमाश की गोली से उनकी जान चली गई। 

संभल के आरक्षी हरेंद्र सिंह और आरक्षी बृजपाल सिंह 17 जुलाई 2019 को अभियुक्तों की पेशी के लिए मुरादाबाद कारागार से चंदौसी न्यायालय जा रहे थे। वापसी में अभियुक्तों ने आरक्षी गणों की आंखों में मिर्ची पाउडर डालकर फायङ्क्षरग कर दी। इस फायङ्क्षरग में हरेंद्र और बृजपाल को जान गंवानी पड़ी। 

भारत की उत्तरी सीमा लद्दाख में 21 अक्टूबर 1959 कोनियमित गश्त पर निकले सीआरपीएफ के जवान चीनी सेना के छल का शिकार हो गए थे। मातृभूमि के लिए अदम्य साहस का परिचय देते हुए 10 जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। जांबाज सिपाहियों के आत्मोत्सर्ग की स्मृति में तभी से यह दिवस पूरे देश में मनाया जाता है।

Posted By: Dharmendra Pandey

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