लखनऊ, (जेएनएन)। जेनरिक दवाओं पर भारत के दबदबे को खत्म करने की साजिश चीन रच रहा है। भारत दुनिया में 60 प्रतिशत तक जेनरिक दवाएं सप्लाई करता है। यह चीन को नागवार गुजर रहा है। ऐसे में जेनरिक दवाएं बनाने के लिए जो कच्‍चा माल हम चीन से खरीदते हैं, उस इंडस्ट्री को वह बंद करने जा रहा है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के हेल्थ रिसर्च डिपार्टमेंट के सचिव प्रो. बलराम भार्गव ने दी। केजीएमयू के 14 वें दीक्षा समारोह में उन्हें डीएससी की मानद उपाधि दी गई। इस मौके पर उन्होंने कहा कि चीन प्रदूषण फैलने का बहाना बनाकर यह काम करने जा रहा है।

प्रो. बलराम भार्गव ने बताया कि जेनरिक दवाओं को बनाने के लिए जो कच्‍चा माल भारत चीन से खरीदता है उसे एक्टिव फार्मा इंग्रिडियंट (एपीआइ) कहते हैं। चीन में एपीआइ बनाने वाली इंडस्ट्री को प्रदूषण फैलाने का हवाला देकर उसे बंद करने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में दुनिया में अगर भारत जेनरिक दवाएं बनाने के मामले में बादशाहत कायम रखना चाहता है तो उसे खुद अपने यहां एपीआइ इंडस्ट्री स्थापित करनी होगी। यह काम कोई बहुत कठिन भी नहीं है। केंद्र सरकार इसे लेकर गंभीर है। प्रो. भार्गव ने कहा कि हम मेडिकल टूरिज्म के मामले में दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं। आयुष्मान भारत योजना हेल्थ केयर में बड़ा बदलाव लाएगी।

केजीएमयू भर रहा तरक्की की नई उड़ान

कार्यक्रम में केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने वार्षिक रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि देश विदेश की 21 यूनिवर्सिटीज से एमओयू किए गए। 577 रिसर्च पेपर केजीएमयू की फैकल्टी के विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुए। नैक में ए ग्रेड मिला है। वहीं एमएचआरडी द्वारा टीचिंग-लर्निंग में केजीएमयू टॉप पर है। नेशनल इंस्टीट्यूट रैकिंग फ्रेमवर्क में पांचवें नंबर पर हम हैं। इसके अलावा स्पोर्ट्स मेडिसिन, पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक व जीरियाट्रिक मेडिसिन के विभाग पिछले एक साल में शुरू हुए। मास्टर इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन व मास्टर इन हेल्थ प्रोफेशनल मेडिकल एजुकेशन के कोर्स शुरू किए गए। बलरामपुर में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई के नाम से खुल रहे सेटेलाइट कैंपस में 25 दिसंबर को उनकी जयंती पर ओपीडी शुरू होगी। वहीं रहमान खेड़ा में द्वितीय कैंपस बनाया जाएगा।

 

Posted By: Anurag Gupta

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