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BRICS सम्मेलन से जगी उम्मीद, अब रूस-चीन और ब्राजील में बढ़ेगी लखनवी चिकन की धाक

Published: Mon, 14 Sep 2026 11:48 AM (IST)

चिकनकारी का वार्षिक कारोबार 1500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, और अब कारोबारी ब्रिक्स देशों में इसके निर्यात की बड़ी संभावनाएं देख रहे हैं।

अब रूस-चीन और ब्राजील में बढ़ेगी लखनवी चिकन की धाक।

अब रूस-चीन और ब्राजील में बढ़ेगी लखनवी चिकन की धाक।

HighLights

  1. चिकनकारी का वार्षिक कारोबार 1500 करोड़ रुपये तक पहुंचा।

  2. ब्रिक्स देश चिकनकारी निर्यात के लिए नई उम्मीदें जगा रहे हैं।

  3. चीन, रूस, ब्राजील में चिकनकारी के लिए बाजार की संभावना।

महेन्द्र पाण्डेय, लखनऊ। चिकनकारी के जिस हुनर की पहचान दुनिया में है, उसका अंतरराष्ट्रीय ब्रांड अभी उतना मजबूत नहीं है, लेकिन कारोबारी ब्रिक्स देशों में इसकी ब्रांडिंग की बड़ी संभावनाएं देख रहे हैं।

कारोबारियों का मानना है कि ऐसे समय में जब भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हो रहा है, तब चिकन कारोबार के लिए इसके सदस्य देश नई उम्मीद हैं। चूंकि भारत ने व्यापार, एमएसएमई, डिजिटल भुगतान, वैश्विक आपूर्ति शृंखला और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर जोर दिया है।

इसके दृष्टिगत यहां के चिकन कारोबारी ब्रिक्स के देशों में निर्यात बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल चिकन का वार्षिक कारोबार निरंतर बढ़ रहा है। वर्तमान में यह करीब 1500 करोड़ रुपये पहुंच गया है। अब इसे और बढ़ाने की तैयारी है।

लखनऊ चिकनकारी हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राजीव महेंद्रू के अनुसार फिलहाल यहां से ब्रिक्स के सदस्य देशों में ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ब्राजील, चीन व रूप तक चिकनकारी के उत्पाद भेजे जाते हैं।

हालांकि चिकनकारी की विदेशी मांग का सबसे बड़ा केंद्र लंबे समय से खाड़ी देश रहे हैं। पश्चिम एशिया के संकट से पहले खाड़ी देशों को लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक के चिकनकारी उत्पाद प्रतिवर्ष भेजे जाते थे। इसे और बढ़ाने की ओर निगाहें लगी हैं। चिकनकारी के लिए चीन दिलचस्प बाजार है।

चीन दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के बीच व्यापार संतुलन, आपूर्ति शृंखला और बाजार पहुंच को लेकर बातचीत भी हुई है। दोनों देशों ने व्यापार और बाजार पहुंच को अधिक सुगम बनाने तथा व्यापार असंतुलन पर काम करने की जरूरत पर जोर दिया है। भविष्य में इसका लाभ चिकनकारी उत्पाद को भी मिलेगा।

रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में नए ग्राहक बनाने का मौका

रूस में चिकनकारी के लिए बाजार की संभावना बढ़ी है। प्रदेश सरकार भी रूस के साथ व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने के लिए प्रयास कर चुकी है। 2025 के उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में रूस को साझेदार देश बनाया गया था।

चिकन कारोबारी विनोद पंजाबी के अनुसार ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका हमारे उत्पाद के लिए महत्वपूर्ण हैं। दोनों बाजारों में चिकनकारी के लिए जगह बनाई जा सकती है। खासतौर पर हाथ से बनी चिकनकारी इन बाजारों में सामान्य सस्ते परिधानों से अलग श्रेणी बना सकती है।

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ये भी हैं उम्मीदें

  • यदि ब्रिक्स देशों के एमएसएमई और कारीगरों के लिए साझा डिजिटल बाजार बनता है तो चिकनकारी उद्यम सीधे खरीदारों तक पहुंच सकेंगे।
  • ब्रिक्स में डिजिटल भुगतान और वित्तीय सहयोग से छोटे कारीगर-उद्यमियों को फायदा मिल सकता है।
  • छोटे उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जोड़ने के लिए चिकनकारी आदर्श क्षेत्र है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में घरेलू कारीगर जुड़े हैं।
  • ब्रिक्स सदस्य देशों के पारंपरिक हस्तशिल्प, हैंडलूम, टेक्सटाइल और कलाओं को प्रदर्शित किए जाने का भी कारोबारियों को होगा।