यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 14, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
हाई कोर्ट : मुख्य स्थायी अधिवक्ता चतुर्थ भईयालाल वर्मा हटाए गए, पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के थे करीबी
यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में नियुक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता चतुर्थ भईया लाल वर्मा को हटा ...और पढ़ें

लखनऊ, विधि संवाददाता। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में नियुक्त मुख्य स्थायी अधिवक्ता चतुर्थ भईया लाल वर्मा को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उन्हें पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का करीबी बताया जाता है। यह आदेश न्याय विभाग के अनु सचिव विनय कुमार पाठक की ओर से जारी किया गया है।
आदेश में कहा गया है कि भईयालाल की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती है। बता दें कि मंगलवार को सरकार ने अपर महाधिवक्ता ज्योति सिक्का व स्थायी अधिवक्ता अमित मिश्रा को हटा दिया था। इससे पूर्व सरकार अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता एचपी श्रीवास्तव व कुछ अन्य सरकारी अधिवक्ताओं को भी हटा दिया था। महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने भी कई दिन पहले अपना सरकारी कार्यालय खाली कर दिया है साथ ही आवंटित स्टाफ भी वापस कर दिया है।
इस बीच सचिवालय में ब्रीफ होल्डरों की चल रही स्क्रीनिंग को लेकर अवध बार एसोसिएशन के महासचिव अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय व जस्टिस सुभाष त्रिपाठी की पीठ के सामने आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि ब्रीफ होल्डर्स हाई कोर्ट में आफिसर आफ कोर्ट माने जाते हैं ऐसे में सचिवालय में बुलाकर उनका इंटरव्यू लेना वकालत के पेशे की गरिमा को गिराने वाला है।
इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार किसी भी सरकारी अधिवक्ता के कामकाज से संतुष्ट नहीं है तो उसे अधिकार है कि अपने पैनल से हटा दे, लेकिन इस प्रकार स्क्रीनिंग कर यदि उनके खिलाफ कार्यवाही की गयी तो इससे उनके भविष्य की संभावनाओं पर विपरीत असर पड़ेगा।
उन्होंने पीठ से सरकार की इस प्रकार की गतिविधि पर विराम लगाने की मांग की। इसके बाद पीठ ने मुख्य स्थायी अधिवक्ता जे के सिन्हा को बुलाकर ब्रीफ होल्डरों को सचिवालय में बुलाकर इंटरव्यू लेने के प्रति नाखुशी व्यक्त की। इस सुनवाई के दौरान अदालत में सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे।