लखनऊ में अंतरराज्यीय चोर गिरोह का सरगना गिरफ्तार, 300 से ज्यादा वारदातों को दे चुका है अंजाम
लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन के पास से अंतरराज्यीय चोर गिरोह का सरगना संदीप सुधाकर तिजोरे गिरफ्तार हुआ है, जो 2009 से 300 से अधिक चोरियों में सक्रिय था।
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लखनऊ में गिरफ्तार आरोपितों के साथ नीली शर्ट में संदीप सुधाकर तिजोरे
HighLights
सरगना संदीप तिजोरे 2009 से 300 से अधिक चोरियों में सक्रिय।
नए युवकों को गिरोह में शामिल कर चोरी का तरीका सिखाता था।
चारबाग रेलवे स्टेशन के पास से पांच सदस्य गिरफ्तार, लाखों बरामद।
आयुष्मान पांडेय, लखनऊ। चारबाग रेलवे स्टेशन और आसपास यात्रियों की जेब साफ करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का सरगना संदीप सुधाकर तिजोरे वर्ष 2009 से चोरी की घटनाओं में सक्रिय है।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि वह अब तक 300 से अधिक चोरी की वारदात को अंजाम दे चुका है। संदीप की खासियत यह थी कि वह अलग-अलग जिलों में नए युवकों को गिरोह में शामिल कर उन्हें चोरी का तरीका सिखाता था। इसके बाद गिरोह को स्टेशन और आसपास के इलाकों में सक्रिय कर देता था। पुलिस अब उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
बुधवार को क्राइम ब्रांच ने चारबाग रेलवे स्टेशन के पास से गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इनमें महाराष्ट्र के अहमदनगर निवासी संदीप सुधाकर तिजोरे, सोनभद्र निवासी अरविंद गुप्ता, नासिक निवासी कुनाल विलास सिरसाठ, मुंबई निवासी जावेद अख्तर और गोंडा निवासी सोनू शामिल हैं।
आरोपितों के कब्जे से 1.24 लाख रुपये और वारदात में इस्तेमाल स्कूटी बरामद हुई थी। पुलिस ने संदीप को गिरोह का सरगना और जावेद को उसका प्रमुख सहयोगी बताया है। पूछताछ में गिरोह के वारदात करने का तरीका भी सामने आया। ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचते ही गिरोह के सदस्य भीड़ में घुस जाते थे।
जनरल डिब्बे में यात्रियों के बीच बैठकर पहले शिकार तलाशते और मौका मिलते ही धक्का-मुक्की के दौरान जेब से रुपये और कीमती सामान पार कर देते थे। यात्री का ध्यान भटकाना इनके लिए सबसे आसान तरीका था। इसके अलावा ऑटो और ई-रिक्शा में यात्री बनकर भी जेब काटने की वारदात करते थे।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि सूचना के आधार पर गिरोह के पकड़ा गया है। आगे की कार्रवाई के लिए जीआरपी को जानकारी दी गई है। साथ ही उनकी टीम भी लगी हुई है।
एक सप्ताह बाद बदल देता था गिरोह
पुलिस के मुताबिक, गिरोह किसी स्टेशन और उसके आसपास करीब एक सप्ताह तक सक्रिय रहता था। जिस गिरोह को ट्रेन करता था, तो उसके बाद दूसरे स्थान पर चला जाता था। अगर जीआरपी पुलिस जेल भी भेजती थी, तो अधिवक्ताओं की मदद से जल्दी छूट आता था।
फिर सक्रिय हो जाता है। संदीप के खिलाफ वर्ष 2009 से मुंबई और महाराष्ट्र के कई रेलवे थाना क्षेत्रों में चोरी के मुकदमे दर्ज हैं। इनमें कुर्ला, मानखुर्द, वडाला, नासिक रोड और ठाणे के मामले शामिल हैं। जावेद के खिलाफ भी मुंबई रेलवे से संबंधित वर्ष 2025 का मुकदमा सामने आया है।
जौनपुर के युवकों से जुड़े तार
अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव के मुताबिक गिरोह के तार जौनपुर के कुछ युवकों से जुड़े होने की जानकारी मिली है। उनकी तलाश में पुलिस टीम दबिश दे रही है। जीआरपी की मदद से गिरोह के अन्य सदस्यों और संदीप द्वारा अलग-अलग जिलों में तैयार किए गए नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।
