लखनऊ, जेएनएन। दुष्कर्म के मामले में जेल में निरुद्ध चल रहे उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के अमेठी में आवास विकास कॉलोनी स्थित आवास और सपा एमएलसी रमेश मिश्रा के हमीरपुर स्थित आवास समेत उत्तर प्रदेश और दिल्ली के 22 स्थानों पर सीबीआइ टीम ने छापेमारी की कार्रवाई की है। बताया जा रहा है कि सीबीआइ ने यह कार्रवाई खनन घोटाले को लेकर की है, जिसमें गायत्री प्रजापति के 3 ठिकानों पर छापे मारे गए हैं। अमेठ में सीबीआइ की 14 सदस्यों की टीम ने गायत्री के घर से सघन तलाशी लेते हुए विभिन्न कागजात व अभिलेख बरामद किए हैं। उनके कार्यालय का कम्प्यूटर भी सील कर दिया गया है।

सीबीआइ के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बुधवार को गायत्री प्रजापति के अमेठी स्थित तीन घरों की तलाशी ली गई। इसके साथ ही सपा के ही पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी के जालौन स्थित घर को भी खंगाला गया। गायत्री प्रजापति ने खनन मंत्री रहते हुए घनश्याम अनुरागी को भी खनन पट्टा जारी किया था। वहीं खनन घोटाले के केंद्र रहे हमीरपुर में 11, लखनऊ में चार, दिल्ली में दो और गाजियाबाद में एक स्थान पर छापा मारा गया। सीबीआइ ने छापे में अहम दस्तावेज बरामद होने का दावा किया है।

हमीरपुर में एमएलसी समेत चार घरों में छापा

हमीरपुर में भी सीबीआइ ने खनन घोटाले को लेकर जिले में छापेमारी की है। सपा से एमएलसी रमेश मिश्रा के पैतृक गांव इमिलिया में सुबह सात बजे पहुंची टीम ने करीब डेढ़ घंटे तक घर की तलाशी ली और लोगों से पूछताछ की। इसके बाद राठ पहुंचकर सीबीआइ टीम ने कस्बे के जुगयाना मोहल्ला में रहने वाले जगदीश राजपूत, चरखारी रोड के मदन राजपूत, ददरी और सिकंदरपुर मोहल्ला स्थित राकेश दीक्षित के मकान में छापेमारी की। टीम ने बुधवार को पांचवीं बार छापेमारी की। टीम ने इमिलिया स्थित मौजूद एमएलसी के घर में मौजूद उनके परिवारजनों से पूछताछ की। साथ ही, सोफे व बेड में पड़े गद्दे आदि को भी हटाकर तलाशी ली। वहीं, घर में बनी अलमारी को ताला तुड़वाकर खंगाला।

सपा सरकार में खनन मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति का नाम चर्चा में रहा था। खनन मामले को लेकर उनके खिलाफ कई शिकायतें हुई थी। कहा जा रहा है कि अवैध खनन मामलों की जांच को लेकर सीबीआइ की टीम ने छापेमारी की है। फिलहाल अधिकारी गायत्री के परिजनों से पूछताछ कर रहे हैं। पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के कार्यालय पर लगे कम्प्यूटर को सीबीआई ने सील कर दिया और अन्य जरूरी कागजात कब्जे में ले लिया।

यही नहीं पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ लोकायुक्त की जांच भी चल रही है। पूर्व मंत्री को दुष्कर्म के आरोप में जेल जाना पड़ा। तब से लेकर आज तक उनकी मुश्किलें कम नहीं हुईं और वह जेल में ही हैं।

बुधवार की सुबह ग्यारह बजे के करीब अमेठी स्थित आवास विकास कॉलोनी के उनके आवास पर सीबीआई टीम ने छापेमारी की। शुरू में तो किसी को पता ही नहीं चला कि आखिर हो क्या रहा है। सीबीआइ दल ने छापेमारी के संबंध में स्थानीय पुलिस और प्रशासन को भी कोई सूचना नहीं दी। सीबीआइ ने अपने साथ गायत्री प्रसाद प्रजापति के भतीजे सुरेंद्र प्रजापति को ले रखा था।

सुरेंद्र ने ही सारे कमरों और अलमारियों की चाबी सीबीआइ को उपलब्ध कराई। सीबीआइ के अधिकारियों ने विभिन्न कमरों में जाकर के अलमारियों से कागजात व अन्य अभिलेख जप्त कर लिए हैं। सीबीआइ द्वारा छापेमारी की खबर पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस संबंध में सीबीआइ के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

इसी साल जनवरी में उत्तर प्रदेश में हुए खनन घोटाले की सीबीआइ जांच में बड़ा राजफाश हुआ था। हमीरपुर की डीएम रहते हुए आइएएस बी. चंद्रकला पर दस अन्य लोगों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रचते हुए अवैध खनन करवाने का मामला सामने आया था।

समाजवादी पार्टी की सरकार में अवैध खनन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 में यूपी में अवैध खनन की जांच के आदेश दिए। यूपी के सात प्रमुख जिलों में अवैध खनन की शिकायत इलाहाबाद कोर्ट को मिली थी। उस दौरान फतेहपुर, देवरिया, शामली, कौशांबी, सहारनपुर, सिद्धार्थनगर, हमीरपुर में अवैध खनन का मामला सामने आया था। हमीरपुर मामले में दो जनवरी, 2019 को सीबीआइ के डिप्टी एसपी केके शर्मा ने केस दर्ज कराया था। इसी केस में 5 जनवरी को सीबीआइ ने आइएएस बी. चंद्रकला के लखनऊ स्थित फ्लैट सहित 14 स्थानों पर छापेमारी की थी। ये छापेमारी कानपुर, लखनऊ, हमीरपुर, जालौन, नोएडा में भी हुई थी।

ईडी ने भी दर्ज किया है मुकदमा

उत्तर प्रदेश में खनन घोटाले में सीबीआइ के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी जांच कर रहा है। ईडी ने चंद्रकला व रमेश मिश्र समेत 11 लोगों के विरुद्ध मनी लांड्रिंग का केस दर्ज कर रखा है। इन सभी 11 लोगों के विरुद्ध सबसे पहले सीबीआइ ने आइपीसी की धारा 120बी, 379, 384, 420 व 511 तथा एंटी करप्शन एक्ट की धारा 13 (2) व 13 (1) (डी) के तहत मुकदमा दर्ज किया था। सीबीआइ की जांच भी साथ-साथ चल रही है।

आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए खनन पट्टों का आवंटन जारी रहा

दरअसल, 31 मई 2012 को खनन पट्टों की नीलामी ई-टेंडर से कराने का नियम बनाया गया था। 29 जनवरी, 2013 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी इस पर मुहर लगा दी थी। हाई कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया था कि 31 मई, 2012 के पहले जिन लोगों ने पट्टों के लिए आवेदन किया था या जिनका आवेदन लंबित था, उन सभी को निरस्त माना जाए। यानी सभी को ई-टेंडर प्रणाली के माध्यम से नया आवेदन करना होगा, लेकिन हाई कोर्ट के इस आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए खनन पट्टों का आवंटन जारी रहा। खनन मंत्री का कार्यभार संभालने के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुल 14 पट्टों के आवंटन की मंजूरी दी थी, वहीं गायत्री प्रजापति ने खनन मंत्री बनने के बाद कुल आठ पट्टों को मंजूरी दी। अपने आदेश के उल्लंघन से हैरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले की सीबीआइ जांच का आदेश दिया था। सीबीआइ ने इस मामले में गायत्री प्रजापति के साथ ही हमीरपुर की तत्कालीन डीएम बी चंद्रकला को भी आरोपित बनाया है।

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Posted By: Umesh Tiwari

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