लखनऊ, जेएनएन। जलशक्ति विभाग ने पानी की शक्ति का पूरा इस्तेमाल करने के लिए कदम बढ़ाया है। नहर, जलाशयों से बिजली (सोलर, वाटर और विंड) उत्पादन पर काम पिछले कई दिनों से चल रहा है। सौर ऊर्जा उत्पादन की रूपरेखा बन चुकी है और पायलट प्रोजेक्ट के रूप में डेढ़ माह में ऊर्जा उत्पादन की शुरुआत होने जा रही है। इसके बाद नहरें पानी के साथ बिजली भी देंगी।

केंद्र की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में जल शक्ति विभाग का गठन होने के बाद विभाग ने जलस्त्रोत और संसाधनों को लेकर गहन समीक्षा की तो पाया कि सिंचाई विभाग के संसाधनों का पूरा दोहन ही नहीं हो पा रहा है। वहीं, पंप-मोटर आदि का संचालन करने के लिए विभाग को लगभग तीन हजार करोड़ रुपये बिजली बिल प्रतिवर्ष जमा करना पड़ रहा है।

विभाग यदि अपनी 71400 किलोमीटर लंबी नहर, नहर पट्टी, जलाशयों का उपयोग बिजली उत्पादन में करे तो लगभग 13500 मेगावाट बिजली उत्पादन हो सकता है। इसके लिए पिछले दिनों सिंचाई विभाग के अधिकारियों की टीम को गुजरात और दक्षिण भारत के कुछ शहरों में भेजा गया। उन्होंने वहां से लौटकर विभाग को रिपोर्ट सौंपी है।

जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने बताया कि वाटर सेक्टर रीस्ट्रक्चरिंग परियोजना के तहत काफी बदलाव किया जा रहा है। वहीं, जल स्रोतों से वाटर, विंड और सोलर एनर्जी बनाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों की अध्ययन रिपोर्ट के बाद सौर ऊर्जा उत्पादन की रूपरेखा बना ली गई है।

कुल 71400 किलोमीटर की नहर में से लगभग पचास फीसद बड़ी नहर है। इतनी नहर, नहर पट्टी और बड़े जलाशयों पर सौर ऊर्जा उत्पादन का काम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कुछ कंपनियों को दिया गया है। वह स्थान चिह्नित कर रही हैं और उम्मीद है कि एक या डेढ़ माह में कंपनियां काम शुरू कर देंगी। इसके अलावा विंड और वाटर एनर्जी पर अभी अध्ययन चल रहा है।

Posted By: Umesh Tiwari

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