लखनऊ, अवनीश त्यागी। योगी सरकार के तीसरे बजट में वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लिए नुकसान घटाने व समृद्ध खेती का आधारभूत ढांचा मजबूत करने पर ज्यादा जोर दिया है। मौसम व बेसहारा पशुओं से फसलों को हो रही क्षति रोकने पर विशेष ध्यान दिया है। पशु व मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के लिए बजटीय प्रावधान है।

हर खेत तक बीज, खाद और पानी 

प्रधानमंत्री के नारे को साकार करने के लिए मध्य गंगा नहर व सरयू नहर परियोजना, अर्जुन सहायक, बाण सागर और कनहर सिंचाई परियोजना के लिए 6810 करोड़ रुपये से अधिक रकम उपलब्ध कराई है। विभिन्न नलकूप योजनाओं को 182 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं। उर्वरक भंडारण योजना को 150 करोड़ रुपये देने के साथ 60.51 लाख क्विंटल बीज और 77.26 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य है।

बेहतर भंडारण व विपणन जरूरी

आय बढ़ाने के लिए किसानों को उपज का सही मूल्य दिलाने को ग्रामीण क्षेत्रों में हाट पैठ का विकास करने और 40 मंडी स्थलों में पांच हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले भंडार गृह बनाने का प्रस्ताव है। ग्रामीण क्षेत्रों में 500 हाट-पैठ का विकास करने के लिए 150 करोड़ रुपये दिए गए। कृषि शिक्षा के विकास को गोंडा में कृषि महाविद्यालय की स्थापना के साथ 13 कृषि विज्ञान केंद्रों के सुदृढ़ीकरण को 36 करोड़ की व्यवस्था है। 

छुट्टा पशुओं के आतंक से मुक्ति

केंद्र सरकार द्वारा लघु व सीमांत किसानों को 6000 रुपये वार्षिक की आर्थिक मदद सीधे और ऋण आदि की अनेक लुभावनी योजनाएं लागू किए जाने के बाद एक कदम आगे बढ़कर योगी सरकार ने किसानों को छुुट्टा पशुओं के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए बजट में अपनी प्रतिबद्धता जतायी। ग्रामीण क्षेत्रों में कांजी हाउस की स्थापना के लिए 20 करोड़ रुपये की व्यवस्था है। गौ-वंश रखरखाव और गौशाला निर्माण को 247.60 करोड़ उपलब्ध कराए है। मदिरा बिक्री से होने वाली 165 करोड़ रुपये की अनुमानित आय बेसहारा पशुओं पर व्यय होगी। मौसम के नुकसान से बचने को फसल बीमा योजना में 450 करोड़ के साथ राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 890 करोड़ प्रस्तावित है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए दस हजार पंडित दीन दयाल उपाध्याय लघु डेरी स्थापित करने को 64 करोड़ रुपये की व्यवस्था है। दुग्ध नीति 2018 के क्रियान्वयन के लिए पांच करोड़ और दुग्ध संघ व समितियों की स्थिति सुधारने के लिए 93 करोड़ रुपये का प्रावधान है। मत्स्य पालक फंड के लिए 25 करोड़ व विकास अभिकरण के लिए आठ करोड़ की व्यवस्था है।

उजियारा फैलाने को 35922 करोड़

योगी सरकार ने अपने तीसरे बजट में सूबे के हर घर में उजियारा फैलाने के साथ ही हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए भरपूर बिजली उपलब्ध कराने का संकल्प और प्रतिबद्धता दोहराई है। पूर्व की सपा व बसपा सरकार को खराब बिजली व्यवस्था के लिए घेरने वाली भाजपा अब लोकसभा चुनाव के लिए जनता के बीच जाने से पहले सभी को ज्यादा से ज्यादा बिजली देकर खुश बनाए रखना चाहती है। चूंकि बिजली ही विकास का आधार है और अब बिना बिजली कुछ भी संभव नहीं लगता है इसलिए बड़े नगरों में ही नहीं बल्कि गांव से लेकर मजरे तक के हर घर में बिजली से उजियारा फैलाने के लिए योगी सरकार ने अपने तीसरे बजट में ऊर्जा क्षेत्र को कहीं ज्यादा तव्वजो दिया है। पिछली बार के 29883.05 करोड़ से 20.21 फीसद (6039.33 करोड़) अधिक यानि 35922.38 करोड़ रुपये के बजट में नए मदों के लिए 5650.87 करोड़ रुपये रखे गए हैं।   

उजाला से घटी 900 मेगावाट मांग

बजट में उजाला योजना का जिक्र करते हुए कहा गया है कि कुल 3.40 करोड़ एलईडी बल्ब बांट कर प्रदेश, देश में दूसरे स्थान पर रहा है। एलईडी बल्ब का इस्तेमाल बढऩे से 900 मेगावाट बिजली की बचत हुई है।  बिजली उत्पादन करने वाली तापीय परियोजनाओं के लिए झारखंड की सहरपुर-जमारपानी कोल ब्लाक के विकास के लिए बजट में 12.77 करोड़ रुपये दिए गए हैैं। 

बढ़ रहा ऊर्जा क्षेत्र का बजट

अखिलेश सरकार के अंतिम बजट में ऊर्जा क्षेत्र के लिए भले ही भारी-भरकम धनराशि की व्यवस्था की गई थी लेकिन, उससे पहले वित्तीय वर्ष 2011-12 के बजट में मात्र 8933 करोड़ रुपये ही इस मद में रखे गए थे। वर्ष 2013-14 में 11732 करोड़, वर्ष 2014-15 में 23928 करोड़ रुपये व वित्तीय वर्ष 2015-16 में ऊर्जा क्षेत्र के लिए 25764 करोड़ रुपये थे। अपने पहले बजट में 19347.71 करोड़ रखने वाली योगी सरकार ने दूसरे बजट में 29883.05 करोड़ रुपये बिजली की व्यवस्था सुधारने के लिए रखे थे जबकि गुरुवार को पेश किए गए तीसरे बजट में 20.21 फीसद अधिक कुल 35922.38 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार ने दावा किया है कि उसने चालू वित्तीय वर्ष के दौरान रिकार्ड 20062 मेगावाट तक बिजली की आपूर्ति की है। 

बजट में बिजली

  • सौभाग्य के तहत दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में एचटी लाइन के लिए 429 करोड़
  • उदय योजना के तहत ब्याज रहित ऋण को अनुदान में बदलने के लिए 4891.72 करोड़ 
  • ट्रांसमिशन नेटवर्क कार्य के लोन की अदायगी के लिए - 81.03 करोड़  
  • वितरण क्षेत्र के लिए लोन की अदायगी के लिए 104.17 करोड़
  • अनपरा, हरदुआगंज व पारीछा बिजली परियोजनाओं के लिए 132.18 करोड़ 

 

Posted By: Nawal Mishra

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