लखनऊ, (जेएनएन)। अपने गीतों से श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाले संगीतकार वाजिद खान कहते हैं कि संगीत किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करता। अमीर हो या गरीब। बड़ा हो या छोटा। संगीत सबके लिए बराबर है। पहले यह संगीत कुछ लोगों तक ही सीमित था, लेकिन समय के साथ हो रहे बदलाव में संगीत की पहुंच कई गुना बढ़ा दी है। कम्प्यूटर के आने के बाद दुनिया के किसी भी देश के संगीत को आप अपने मोबाइल पर सुन सकते हैं। इसने भाषा के महत्व को कम कर दिया। आज कई अंग्रेजी गाने हैं, जो भले ही श्रोताओं को समझ में नहीं आते, लेकिन लोग उसको सुनते हैं।

बॉलीवुड संगीतकार वाजिद खान सोमवार को अपने सिंगिंग रियलिटी शो का प्रमोशन करने लखनऊ आए थे। इस बीच फिल्म दबंग के संगीत के लिए वर्ष 2011 में फिल्म फेयर पुरस्कार पाने वाले वाजिद ने शो के प्रमोशन के साथ फिल्म इंडस्ट्री के अपने अनुभवों को साझा किया। गोमती नगर स्थित पांच सितारा होटल में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि अच्छा सिंगर बनने के लिए अच्छा इंसान होना जरूरी है। जबतक गायक के अंदर सोल (रूह) नहीं होगी, वह अच्छा सिंगर नहीं बन सकता। संगीत की कोई परिभाषा नहीं। आपको सारे राग और सारी ताल याद हो, रियाज भी करते हो। पर सोल नहीं तो सब बेकार है। संगीत में छल कपट नहीं है। अगर गीत अच्छा होगा, तभी श्रोताओं को पसंद आएगा। आप श्रोताओं को कुछ भी परोस कर वाहवाही नहीं ले सकते।

मेरा मानना है कि तीन तरह के सिंगर होते हैं। एक गला सिंगर, जो झूठ में गाते हैं। दूसरा पेट सिंगर जो अपनी भूख के लिए गाते हैं। तीसरा है दिल से गाने वाले, वहीं सच्चे सिंगर होते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि रियलिटी शो में हाईवोल्टेज ड्रामा दिखाने के लिए कहानी नहीं बनाई जाती। जो लोग यह कहते हैं कि शो में उन्हीं प्रतिभागियों को लिया जाता है, जिसके पीछे कोई दुख भरी कहानी हो यह गलत है। लेकिन कई बार सच्ची कहानियों को दिखाते हैं, ताकि लोगों को प्रेरणा मिले। दरअसल हम लोग इतने संवेदनहीन हो गए हैं कि दूसरों की सच्ची बात भी हमें झूठ लगती है। उन्होंने हाल में ही ताजदार-ए-हरम गीत दिया था, जो अभी तक श्रोताओं की जुबां पर छाया है।

लखनऊ बहुत ही अच्छा शहर

लखनऊ बहुत ही अच्छा शहर है। यहां आने का मौका कभी नहीं छोड़ता। नवाबों के इस शहर की बात ही अलग है। यहां के लोग, यहां की तहजीब, खानपान और सलीका। सब कुछ लाजवाब है। इसबार तालीम इंस्टीट्यूट की शुरुआत करने के लिए थोड़ा बिजी था। इसलिए डेढ़ साल बाद लखनऊ आने का मौका मिला। कुछ दिन पहले सेट पर मुझे चोट लग गई थी। डॉक्टरों ने चलने फिरने से मना किया था। इसलिए शो में नहीं आ सका। ठीक होने के बाद सबसे पहले लखनऊ आया।

हर दौर का संगीत अच्छा

समय के साथ संगीत भी बदलता रहता है। 60 और 70 के दशक का संगीत बहुत ही मधुर था, जो आज भी लोगों की जबान पर है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आज का संगीत अच्छा नहीं है। यह बदलते समय का संगीत का। कुछ साल बाद यही संगीत मधुर लगेगा। दूसरी एक वजह यह भी है कि पहले संगीत सीमित था। रेडियो के प्रोग्राम जैसे बिनाका गीत माला तक। इसलिए भी लोगों का लगाव ज्यादा था उसके प्रति। रेडियो और टीवी के बाद मोबाइल के आने से संगीत की दुनिया ही बदल गई। अब लोग संगीत से ज्यादा जुड़े हैं। आज का बच्चा भी तबला, गिटार, हारमोनियम, सिंथेसाइजर और ऑक्टोपैड को जानता है। 

टैलेंट की कमी नहीं

वह कहते हैं कि यह मेरा चौथा सीजन है। हर बार से अधिक टैलेंट इसबार नजर आ रहा है। इसबार रियलिटी शो में प्रतिभागियों की आयु के साथ लिंगभेद सीमा को भी समाप्त कर दिया है। बड़ा हो या छोटा। अमीर हो या गरीब। हर किसी को अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका मिलेगा। अपने देश में टैलेंट की कोई कमी नहीं है। बस जरूरत है युवा पीढ़ी को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए सही मंच मिलने की। समय के साथ लोगों की सोच बदल रही है। न्यू इंडिया की सोच बहुत अच्छी है। मां-बाप भी अपने बच्चों की प्रतिभा को पहचान कर उनको उसी दिशा में आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

Posted By: Anurag Gupta

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप