लखनऊ [जितेंद्र शर्मा]। दशकों तक अपनी बदहाली पर आंसू बहाता रहा बुंदेलखंड अब बदला-बदला नजर आ रहा है। वामपंथ को लाल सलाम कर चुके बुंदेले लंबे समय तक कांग्रेस के सामने हाथ जोड़े खड़े रहे। यहां की सूखी घास ने बसपा के हाथी को भरपूर पोषण दिया तो कुछ भरोसा समाजवाद पर भी किया। यह उस दौर का बुंदेलखंड था, जो किसी पर भी भरोसे को मजबूर था, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव से भाजपा पर उसका जो विश्वास मजबूत हुआ तो बाकी दलों का सफाया होता चला गया। भाजपा सरकार सूखी धरती की प्यास बुझाकर अपना वादा पूरा कर रही है। कानून व्यवस्था पर भी संतुष्टि की मुहर है, लेकिन स्थानीय हालात इशारा कर रहे हैं कि सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि अगले चंद महीनों में भाजपा को भरपूर पसीना बहाना होगा।

सूखे-उजाड़ बुंदेलखंड में जहां धूल उड़ाती पगडंडियां नजर आती थीं, वहां अब चौड़ी-चौड़ी काली सड़कें आपको काफी कुछ बदल चुके इस अंचल में प्रवेश कराती हैं। लोकार्पण के लिए लगभग तैयार बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और डिफेंस कारिडोर उस राजनीतिक वफादारी पर हस्ताक्षर करते हैं, जिसकी उम्मीद में 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 2017 के विधानसभा चुनाव और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को शत-प्रतिशत सीटें यहां की जनता ने दीं। मामला दोनों तरफ गर्मजोशी का रहा। 2014 के पहले एक भी लोकसभा सीट भाजपा के हिस्से में नहीं थी। इस चुनाव में चार की चार सीटें भगवा दल जीता और यह कब्जा 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बरकरार रहा। इसी तरह 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 19 में से मात्र तीन सीटें मिलीं। उनमें से भी दो सीटें उपचुनाव में हार गई। फिर 2017 में यह धरती ऐसी रीझी कि 19 की 19 सीटों पर कमल खिला दिया। इससे उत्साहित भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार ने योजनाओं का पिटारा खोल दिया।

सड़कों के मजबूत संजाल के साथ सबसे बड़ी सौगात हर घर जल योजना है। सरकार का दावा है कि दिसंबर तक हर घर तक पाइप लाइन से पानी पहुंचने लगेगा। इसकी खुशी झांसी के बबीना ब्लाक स्थित बुढ़पुरा गांव निवासी मुन्ना के मुंह से सुन सकते हैं। वह कहते हैं कि कभी सोचा ही नहीं था कि शहरों की तरह हमारे घर में भी पानी पहुंचेगा। रवि राजपूत भी उनकी बात का समर्थन करते हैं कि सिर्फ भाजपा सरकार ने सोचा तो पानी मिलने जा रहा है।

ऐसी बातें सुनकर संगठन के रणनीतिकार एकतरफा जीत के लिए आश्वस्त हो सकते हैं, विधायक निश्चिंत हो सकते हैं, लेकिन महोबा के गोरखा गांव निवासी कमलेश कुमार और प्रदीप विश्वकर्मा जैसे भी तो बहुत होंगे। इनके घर के ठीक सामने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बन रहा है और हमेशा भाजपा को ही वोट दिया है, लेकिन अब उनकी नाखुशी का तर्क है कि खरीफ की फसल बर्बाद हो गई और मुआवजे के अधिकतर आवेदन खारिज हो गए। अब कोर्ट में लड़ रहे हैं।

झांसी के मऊरानीपुर ब्लाक के बुखारा गांव निवासी जगमोहन अहिरवार और उनके साथ खड़े ग्रामीण स्पष्ट कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गरीबों के लिए बहुत कर रहे हैं, लेकिन अफसर तो सुधरे ही नहीं। वरासत अभियान चला, लेकिन अफसरों ने इतने चक्कर लगवाए कि बिना काम कराए घर बैठना पड़ा। विधायक से शिकायत क्यों नहीं की? जवाब इशारा कर देता है कि 2014 के चुनाव से भाजपा के लिए उपजाऊ बनी इस धरती पर फिर से फूल खिलाने के लिए कुछ खरपतवार संगठन को हटानी होगी।

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस