लखनऊ (जेएनएन)। सपा, बसपा, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के महागठबंधन का भविष्य अभी निर्णायक मुकाम पर नहीं है लेकिन, इस संभावित चुनौती का जवाब देने को भाजपा अपनी बुनियाद मजबूत कर रही है। फिलहाल पिछड़ों को साधने के लिए जातिवार सम्मेलन चल रहे हैं। इस बीच पार्टी ने सितंबर के अंत या अक्टूबर माह में पिछड़ों की बड़ी रैली आयोजित करने की भी तैयारी शुरू कर दी है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी आ सकते हैं।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नाम पर पिछड़ों को एकजुट करने वाली भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाया और उनकी अगुआई में विधानसभा लड़ा। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा को अप्रत्याशित सफलता मिली। अब फिर से पिछड़ों को साधने के लिए भाजपा ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को कमान सौंपी है।

अब तक प्रजापति समाज, राजभर, सविता-सेन-नाई, अर्कवंशीय, विश्वकर्मा, पाल-बघेल, साहू-राठौर, लोधी-किसान-राजपूत और भुर्जी समाज का सम्मेलन हो चुका है। शुक्रवार को निषाद, कश्यप और बिंद समाज के प्रतिनिधि आमंत्रित किए गए हैं। इसके बाद हलवाई समाज, जाट समाज, कुर्मी-पटेल-गंगवार समाज, गिरी समाज, चौरसिया समाज और फिर यादव समाज का सम्मेलन होना है।

भाजपा ने कुर्मी और यादव समाज के सम्मेलन को भी भव्य रूप देने की तैयारी की है। इन दोनों सम्मेलनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय समेत कई बड़े नेताओं की मौजूदगी रहेगी। भाजपा इन सम्मेलनों के बाद पिछड़े समाज की बड़ी रैली आयोजित करेगी। प्रतिनिधि सम्मेलन में ही इसकी तैयारी शुरू हो गई है। जातिवार सम्मेलनों में हर जिले से दस-दस प्रतिनिधि आते हैं।

अपने समाज में इनकी सक्रियता और दबदबा है। भाजपा इन जातीय क्षत्रपों की ताकत का लाभ उठाएगी। विश्वेश्वरैया सभागार में केशव मौर्य की एक टीम इन प्रतिनिधियों का डाटा संकलित कर रही है। पिछड़ा वर्ग की रैली में सभी के प्रतिनिधित्व के लिए इन्हें जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि भाजपा के साथ पिछड़े, अगड़े और सर्वसमाज के लोग पूरी ताकत से जुड़े हैं।  

Posted By: Ashish Mishra