यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 23, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
भूमि अधिग्रहण लगाएगा 'मिशन-2017 ' को ग्रहण
भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को लेकर विपक्ष व किसान संगठनों की बढ़ती लामबंदी से भाजपा को मिशन-2017 पर ग्रहण लगता दिख ...और पढ़ें
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लखनऊ (अवनीश त्यागी)। भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को लेकर विपक्ष व किसान संगठनों की बढ़ती लामबंदी से भाजपा को मिशन-2017 पर ग्रहण लगता दिख रहा है। एक पूर्व मंत्री समेत एक दर्जन नेताओं ने राष्ट्रीय नेतृत्व से अध्यादेश पर पुनर्विचार किए जाने का अनुरोध किया है।
पत्र में लिखा है कि अध्यादेश की जल्दबाजी से विपक्ष को बैठ-बिठाए किसानों के निकट होने का बेवजह मुद्दा मिल जाएगा। खासतौर से उत्तर प्रदेश में भाजपा के पक्ष में बने हालात भी प्रभावित होंगे। लोकसभा चुनाव में भाजपा को नरेंद्र मोदी के नाम पर ग्रामीण क्षेत्रों में जबरदस्त समर्थन भी मिला। किसानों को प्रधानमंत्री व भाजपा से काफी अपेक्षाएं है, भूमि अधिग्रहण के अध्यादेश से उनकी भावनाएं आहत होने का खतरा है। प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव इसी वर्ष प्रस्तावित है और भाजपा पहली बार पूरे दमखम से चुनावी लड़ाई लडऩे का मन बनाए है। अध्यादेश लागू करने की जल्दबाजी से न केवल पंचायत में भाजपा की फजीहत होगी बल्कि 2017 के विधानसभा चुनाव तक इसका नुकसान झेलना होगा।
ध्यान रहे, भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर मई 2011 को गौतमबुद्धनगर के भट्टा पारसौल में किसानों व पुलिसबल के खूनी संघर्ष और इससे गर्माया किसान आंदोलन वर्ष 2012 में बसपा शासन की विदाई की अहम वजह बना था। तब प्रदेश भाजपा ने पूरी शिद्दत से बसपा विरोधी माहौल तैयार किया परन्तु कुछ विशेष कारणों से सियासी लाभ लेने से वंचित रहे थे। वर्ष 1894 का भूमि अधिग्रहण कानून बदलवाने के लिए राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र व सूर्यप्रताप शाही जैसे नेताओं ने गिरफ्तारी भी दी थी। दिल्ली चुनाव से सबक लेकर भाजपा को उत्तर प्रदेश फतेह करने की तैयारी करनी होगी। बेहतर हो, नेतृत्व इस पर गंभीरता से विचार करे।
रालोद का उपवास
किसानों में खोया जनाधार वापस पाने को छटपटा रहे राष्ट्रीय लोकदल को भूमि अधिग्रहण का मुद्दा केंद्र के खिलाफ और गन्ना भुगतान जैसी समस्याएं प्रदेश सरकार पर हमलावार होने के लिए मिल गयी हैं। प्रवक्ता सुनील रोहटा का कहना है कि गांवों में चौपालों पर पंचायतों के साथ जनसंपर्क कर किसानों को एकजुट किया जाएगा। आज लखनऊ में कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान के नेतृत्व में उपवास पर रहे
राहुल के धरने में पउप्र के कांग्रेसी
भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर 12 मार्च से प्रदेशव्यापी अभियान की तैयारी से पहले कांग्रेस दिल्ली में भी जोर आजमाइश करेगी। प्रवक्ता अमरनाथ अग्रवाल का कहना है कि 25 फरवरी को दिल्ली में संभावित राहुल गांधी के धरना को सफल बनाने के लिए पश्चिमी उप्र से बड़ी संख्या में किसान जुटेंगे।
भाकियू 18 को दिल्ली घेरेगी
महेंद्र सिंह टिकैत के बाद सिमटती जा रही भारतीय किसान यूनियन में फिर से ताकत डालने के लिए दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन की तैयारी है। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत का दावा है कि 18 मार्च को लाखों की संख्या में किसान दिल्ली में डेरा डालेंगे और भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर लम्बी लड़ाई लड़ेंगे।
