लखनऊ (जेएनएन)। भारतीय जनता पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर बेहद गंभीर है। गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पार्टी ने कांग्रेस के गढ़ अमेठी व रायबरेली को टारगेट पर रखा है। दो दिन पहले ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी कर्नाटक विधानसभा चुनाव का प्रचार छोड़कर रायबरेली में सभा करने पहुंचे थे। भाजपा ने क्षेत्र में अपनी लोकप्रियता गंवा रहे सांसदों का टिकट काटना तय कर लिया है। इनके स्थान पर पार्टी योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्रियों को लोकसभा चुनाव में उतार सकती है।

माना जा रहा है 2019 का लोकसभा चुनाव विपक्षी दलों के साथ ही केंद्र तथा प्रदेश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौती रहने वाला है। भाजपा के लिए 2019 में पिछली बार की तरह वापसी करना आसान नहीं होने वाला है। विपक्ष के एकजुट होने और दलितों में भाजपा के खिलाफ बढ़ रहे आक्रोश को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने बड़ा फैसला किया है। इस बार के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश के बागी और उम्रदराज सांसदों के टिकट काटे जायेंगे और उनकी जगह पर योगी आदित्यनाथ सरकार में शामिल कई मंत्री और विधायक चुनाव लड़ेंगे। इस सूची में कई बड़े नेताओं का नाम सामने आ रहा है जिसके बाद नयी चर्चाएं शुरू हो गयी हैं।

भारतीय जनता पार्टी 2019 में सत्ता में वापसी के लिए कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। यही कारण है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने खुद मोर्चा संभाल लिया है और उत्तर प्रदेश में दौरों का सिलसिला शुरू कर दिया है। इस लोकसभा चुनाव में असफल रहने वाले कई सांसदों के टिकट कटना तय बताया जा रहा है। उनकी जगह पर योगी आदित्यनाथ सरकार के कई मंत्रियों को चुनाव लड़ाने की बातें हो रही है।

भाजपा 2019 के लोकसभा चुनावों में प्रदेश के करीब तीन दर्जन सांसदों के टिकट काटेगी। इनको भी अहसास होने लगा है और यह पाला बदलने की फिराक में है। भाजपा के लोग भी अब समाजवादी पार्टी के साथ बहुजन समाज पार्टी तथा कांग्रेस में जगह तलाश रहे हैं। इसके साथ ही दूसरी पार्टी के नेता भाजपा में ठिकाना बनाने की फिराक में हैं। बसपा के दो पूर्व सांसद बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो चुके हैं।

माना जा रहा है कि भाजपा से टिकट कटने वालों में कानपुर से सांसद मुरली मनोहर जोशी समेत देवरिया सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र का नाम शामिल है। कई सांसदों के टिकट उनके क्षेत्र में निष्क्रियता को देखते हुए काटे जा सकते हैं।

इनकी जगह पर योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री लोकसभा के लिए मैदान में उतारे जाएंगे। इनमें से श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ कैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक, मुकुट बिहारी वर्मा, रीता बहुगुणा जोशी, रमापति शास्त्री, चेतन चौहान, दारा सिंह चौहान, सिद्धार्थ नाथ सिंह, श्रीकांत शर्मा व स्वतंत्र देव सिंह के लोकसभा चुनाव में उतरने की चर्चाएं हैं। इसके साथ ही यूपी सरकार में सहयोगी दल भासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को रोकने के लिए राज्यमंत्री अनिल राजभर को भी लोकसभा का चुनाव लड़ाया जा सकता है। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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