लखनऊ, जागरण संवाददाता। गैर राज्यों से आकर लखनऊ में बुजुर्ग पुरुषों व महिलाओं के जेवर उतरवाने वाले गिरोह का अमीनाबाद पुलिस ने राजफाश किया है। गिरोह के बदमाश खुद को पुलिसकर्मी बताते थे। डीसीपी पश्चिम सोमेन बर्मा के मुताबिक गिरोह के सरगना महाराष्ट्र निवासी हसनी अली व उसके साथी खंबर अली, मध्य प्रदेश निवासी मजलूम हुसैन और कनार्टक निवासी अली अब्बास को पकड़ा गया है।

आरोपित विरोध करने पर लोगों पर हमला भी कर देते थे। गिरोह ने लखनऊ समेत कई शहरों व दूसरे राज्यों में घटनाएं की हैं। गिरोह ने आठ नवंबर को लाटूश रोड पर सुंदर बाग निवासी कनक कुमार राय की अंगूठी उतरवा ली थी। कनक कुमार रिक्शे से मेडिसीन मार्केट की तरफ जा रहे थे। इसी बीच बदमाशों ने उन्हें रोक लिया था और आगे बड़ी घटना होने की बात कही थी। इसके बाद अंगूठी उतरवा कर कागज में लपेटने के बहाने उसे लेकर भाग निकले थे। पीड़ित ने थोड़ी देर बाद पुड़ियां खोली थी, जिसमें कंकड़ रखे थे।

कैमरे में कैद हो गए थे टप्पेबाजः कनक कुमार की तहरीर पर एफआइआर दर्ज कर छानबीन शुरू की गई। इस बीच बाराबिरवा चौराहे पर गिरोह ने टप्पेबाजी की। छानबीन में पता चला कि आरोपितों की हरकत कैमरे में कैद है। एक बाइक का नंबर भी फुटेज से मिला। इसके बाद पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर सोमवार को हीवेट रोड से चारों को दबोच लिया। आरोपितों के पास दो बाइक बरामद हुई हैं, जिनके नंबर प्लेट और आरसी फर्जी मिले हैं।

गुमराह करने के लिए बनवा रखी थी पत्रकार की फर्जी आइडीःपकड़े जाने पर लोगों को गुमराह करने के लिए गिरोह ने पत्रकार की फर्जी आइडी भी बनवा कर रखी थी, जिसपर पुलिस क्राइम लिखा था। पुलिस ने चार फर्जी आइडी बरामद की है। गिरोह के पास से चेन, अंगूठी, तमंचा, कई धातु व 11 हजार आठ सौ रुपये समेत अन्य सामान मिले हैं। एडीसीपी पश्चिम चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक पूछताछ में गिरोह ने बताया कि वह एक इलाके में चार बार टप्पेबाजी करने के बाद ठिकाना बदल लेते थे।

यही नहीं गिरोह में शामिल बदमाशों की अदला बदली भी करते थे, जिससे उन्हें कोई पकड़ न सके। पुलिस आरोपितों के अन्य साथियों के बारे में पता लगा रही है। माना जा रहा है कि गिरोह के कई बदमाश अभी भी लखनऊ में मौजूद हैं।

Edited By: Dharmendra Mishra