लखनऊ, जेएनएन। देश में मंदी पर नियंत्रण करने के साथ ही नरेंद्र मोदी सरकार के बैंकों के विलय का विरोध होने लगा है। दस बैंकों के विलय के सरकार के फैसले के खिलाफ बैंक कर्मी बैंक 25 सितंबर की रात के बाद से दो दिन की हड़ताल पर रहेंगे। इसके कारण सभी बैंक में चार दिन कोई काम नहीं होगा। दो दिन हड़ताल के बाद फिर महीने के आखिरी शनिवार और रविवार को भी बैंक बंद रहेंगे।

देश के बैक कर्मी दस बैंकों के विलय के सरकार के फैसले के खिलाफ 25 सितंबर से दो दिन की हड़ताल पर रहेंगे। बैंक कर्मी सरकार के विलय के फैसले से बेहद नाराज हैं। इसके साथ ही बैंक यूनियनों ने बैंकों के एकीकरण की इस योजना के खिलाफ नवंबर के दूसरे सप्ताह से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की भी धमकी दी है।

बैंक कर्मी 25 से 27 सितंबर तक हड़ताल पर रहेंगे। इसके बाद 28 सितंबर को चौथा शनिवार है और 29 सितंबर को रविवार होने की वजह से बैंकों का अवकाश रहेगा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के विरोध और अपनी अन्य मांगों के समर्थन में बैंक कर्मियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। इसके साथ ही सभी बैंक कर्मचारियों की ये भी मांग है की उनकी सैलरी बढ़ाई जाए और उनसे हफ्ते में सिर्फ पांच दिन काम लिया जाए। हफ्ते में बाकी दो दिन छुट्टी रहे।

इस हड़ताल में ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स कनफेडरेशन (एआईबीओसी), आल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए), इंडियन नेशनल बैंक आफिसर्स कांग्रेस (आईएनबीओसी) और नेशनल आर्गेनाइजेशन आफ बैंक आफिसर्स (एनओबीओ) हड़ताल में शामिल होंगे।  सितंबर में दो दिन की हड़ताल के बाद भी अगर विलय पर कोई बात नहीं बनती है तो फिर सभी बैंक कर्मी नवंबर में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। नवंबर के दूसरे सप्ताह से देश की सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी अपनी मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं। 

Posted By: Dharmendra Pandey

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