लखनऊ, जागरण संवाददाता।  बसपा सरकार में स्मारकों के लिए बनाए गए फंड और स्मारकों में काम करने वाले पांच हजार से अधिक कर्मचारियों का सेंट्रल प्रोविडेंट फंड (CPF) पर लगे ग्रहण को बचाने की कवायद तेज हो गई है। स्मारकों के सदस्य सचिव अक्षय त्रिपाठी एक एक पाई वापस लाने के लिए बैंक ऑफ बडौदा से जहां सोमवार को कार्ययोजना बनाकर वार्ता करेंगे, वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा ने शाखा प्रबंधक एन पाल को निलंबित कर दिया है। उधर गोमती नगर थाने की पुलिस साेमवार से विवेचना करने की बात कही है। मामले की जांच उपनिरीक्षक उमेश सिंह को दी गई है।

बैंक ऑफ बडौदा से कृष्ण मोहन श्रीवास्तव सहायक लेखाकार बनकर करोड़ों की हेराफेरी करने वाले की तलाश तेज हो गई है।इसके साथ ही मुकदमे में दर्ज अज्ञात लोगों में कौन है, वह जल्द ही सामने आएंगे। स्मारक अफसरों को बैंक में अफसरों से बातचीत में यह पता चला था कि बैंक में किसी की अच्छी पहुंच थी, तभी बैंक ऑफ बडौदा की रोशनबाद शाखा से नोएडा स्थित कोटक महेंद्र बैंक में पैसे ट्रांसफर किए गए थे। 35 करोड़ ट्रांसफर होते हैं और फिर 25 करोड़ वापस आ जाते हैं। बाकी दस करोड़ नहीं आए। सवाल खड़ा होता है कि अगर 48 करोड़ की दो दो करोड़ की 24 एफडी बनने के लिए दी गई थी, तो यह पैसा आखिर कैसे ट्रांसफर हो गया। कृष्ण मोहन श्रीवास्तव नाम के शख्स जो अधिकृत नहीं था और स्मारक से उसका लेना देना नहीं है, आखिर कहां से आ गया। ऐसे तमाम सवालों को लेकर अगले सप्ताह से कुछ नए नाम सामने आ सकते हैं, जिनकी इस खेल में भूमिका है।

पुलिस द्वारा नौ सितंबर को गबन का मामला दर्ज किया है। बैंक ने मामले की आंतरिक जांच भी शुरू कर दी है और संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से एक्टिव ड्यूटी से निलंबित कर दिया है। बैंक इस मामले के जांच अफसरों का पूरा सहयोग करेगा। बैंक ऑफ बडौडा आश्वस्त करता है कि ग्राहकों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता  पर है।   - बैंक ऑफ बडौदा, कारपोरेट कम्यूनिकेशन

Edited By: Anurag Gupta