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पिता की जान बचाने के लिए बेटे ने 4 महीने में घटाया 20 किलो वजन, बांदा के लाल ने दिया नया जीवन

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Thu, 15 Oct 2026 06:30 AM (IST)

बांदा के एक 24 वर्षीय युवक ने अपने पिता की जान बचाने के लिए चार महीने में 20 किलो वजन ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. बांदा के बेटे ने पिता के लिए 20 किलो वजन घटाया।

  2. फैटी लिवर के बावजूद अंगदान के लिए खुद को तैयार किया।

  3. सफल लिवर प्रत्यारोपण से पिता को नया जीवन मिला।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। पिता की जिंदगी बचाने की चाहत ने 24 वर्षीय बेटे को अपनी सेहत बदलने के लिए प्रेरित किया। बांदा के इस युवक ने चार महीने में करीब 20 किलोग्राम वजन घटाकर अपने लिवर को अंगदान के योग्य बनाया। उसके पिता एडवांस लिवर सिरोसिस से जूझ रहे थे और उनकी जान बचाने के लिए लिवर प्रत्यारोपण जरूरी था। बेटे ने अपने पिता को लिवर का एक हिस्सा देने का फैसला किया, लेकिन शुरुआती जांच में उसके लिवर में गंभीर फैटी लिवर की समस्या सामने आई।

इस कारण डाक्टरों ने उसे अंगदान के लिए अनुपयुक्त बताया। दिल्ली की एक रियल एस्टेट कंपनी में काम करने वाले युवक के सामने अब पिता की जान बचाने के लिए अपनी सेहत सुधारने की चुनौती थी। परिवार में वही एकमात्र ऐसा संभावित दाता था, जिसका लिवर पिता से मेल खा सकता था। डाक्टरों ने परिवार को दूसरे संभावित दाताओं की तलाश करने की सलाह भी दी, लेकिन कोई उपयुक्त दाता नहीं मिला।

पांच बार हुई एमआरआइ जांच

इसके बाद युवक ने नौकरी से अवकाश लिया और बांदा में रहकर वजन घटाने पर ध्यान केंद्रित किया। युवक ने विशेष डाइट अपनाई और डाक्टरों की निगरानी में नियमित जांच कराई। उसने वजन घटाने के लिए कोई दवा का इस्तेमाल नहीं किया। चार महीने की मेहनत के बाद उसका वजन करीब 20 किलो कम हुआ। इस दौरान लिवर में वसा की मात्रा में बदलाव देखने के लिए चार से पांच बार एमआरआइ जांच की गई।

बाद की जांच में लिवर की स्थिति में पर्याप्त सुधार मिला और डाक्टरों ने उसे अंगदान के योग्य माना। अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में लिवर प्रत्यारोपण विभाग के प्रमुख डा.अभिषेक यादव और डा.उत्कर्ष श्रीवास्तव की टीम ने सर्जरी की, जो सफल रही। आपरेशन के करीब एक सप्ताह बाद पिता को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

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डॉ. अभिषेक यादव ने बताया कि बेटे को जांच से पहले अपने लिवर में इतनी अधिक वसा जमा होने की जानकारी नहीं थी। पिता के लिए अंगदान का फैसला लेने के बाद ही समस्या सामने आई। बेटे ने चिकित्सकीय सलाह, नियंत्रित खानपान और नियमित निगरानी से अपनी सेहत में सुधार किया।