विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

दो पैन कार्ड केस में जमानत के बाद भी जेल में ही रहेंगे आजम खान, ED के मामले में फंसा पेंच; सोमवार को होगी सुनवाई

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Fri, 30 Oct 2026 06:21 AM (IST)

सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत ...और पढ़ें

सपा नेता आजम खान।

सपा नेता आजम खान।

HighLights

  1. आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में जमानत मिली।

  2. ईडी के भ्रष्टाचार मामले में रिमांड आवेदन से रिहाई अटकी।

  3. दोषसिद्धि पर रोक नहीं, विधानसभा चुनाव लड़ने की राह मुश्किल।

जागरण टीम, लखनऊ। दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद सपा नेता आजम खान की रिहाई पर पेच फंस गया है। ईडी की ओर से दर्ज कराई गई भ्रष्टाचार की प्राथमिकी में पुलिस ने रिमांड के लिए रामपुर के स्पेशल कोर्ट (एमपी-एमएलए सेशन ट्रायल) में आवेदन प्रस्तुत कर दिया है।

इस मामले में सोमवार को सुनवाई है। रिमांड मंजूर होने की दशा में इस मामले में भी जमानत कराने के बाद ही आजम खान जेल से बाहर आ पाएंगे। गुरुवार को न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने आजम खान और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम को जमानत दे दी। हालांकि, कोर्ट ने दोनों की दोषसिद्धि (सजा स्टे) पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया, जिससे उनके आगामी विधान सभा चुनाव लड़ने की राह फिलहाल साफ नहीं हुई है।

हाई कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के लिए जनवरी 2027 के तीसरे सप्ताह की तिथि तय की है।कोर्ट ने कस्टडी सर्टिफिकेट का हवाला देते हुए माना कि आजम खान (4 वर्ष 1 माह 9 दिन) और अब्दुल्ला आजम (3 वर्ष 6 माह 13 दिन) अपनी सजा का एक बड़ा हिस्सा काट चुके हैं।

किस शर्त पर मिली जमानत?

इसी आधार पर आधी जुर्माना राशि तत्काल जमा करने की शर्त पर दोनों को जमानत दी गई। हालांकि, दोषसिद्धि पर रोक की मांग को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि आजम खान के खिलाफ 92 मुकदमे दर्ज हैं (जिसमें 8 में सजा हो चुकी है) और अब्दुल्ला पर 46 मामले हैं।

आपराधिक पृष्ठभूमि, मामले की गंभीरता और सामाजिक प्रभाव को देखते हुए दोषसिद्धि पर स्टे देने का कोई न्यायोचित आधार नहीं है। भाजपा नेता आकाश सक्सेना (अब विधायक) की तहरीर पर छह दिसंबर 2019 को रामपुर में एफआइआर दर्ज हुई थी। रामपुर की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने पिछले वर्ष नवंबर में दोनों को दोषी ठहराया था। बाद में राज्य सरकार की सजा बढ़ाने की अर्जी पर अपीलीय अदालत ने इस वर्ष 20 अप्रैल और 23 मई को सजा में वृद्धि कर दी।

आजम खान को आइपीसी की धारा 467 (वसीयत, गोद लेने का अधिकार पत्र, कीमती कागजात, या धन-संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के साथ फर्जीवाड़ा या धोखाधड़ी करना।) में 10 साल कठोर कारावास और दो लाख रुपये जुर्माना तथा अब्दुल्ला आजम को अधिकतम पांच से सात साल तक की कठोर कैद की सजा सुनाई। इसी वर्ष 13 अक्टूबर को ईडी ने आजम खान व उनके जौहर ट्रस्ट समेत पांच लोगों के खिलाफ विश्वविद्यालय निर्माण में सरकारी धन के गबन आदि व धोखाधड़ी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

यह भी पढ़ें- आगरा: लूट के आरोपितों को पकड़ने पहुंची दिल्ली पुलिस पर पथराव, वर्दी फाड़ी और बदमाशों को छुड़ा ले गई भीड़; 3 पर FIR

प्रकरण की विवेचना टांडा के सीओ पंकज पंत कर रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को न्यायालय में इस प्रकरण का हवाला देते हुए आजम खान के खिलाफ रिमांड वारंट जारी करने का अनुरोध किया। कानून के जानकारों के मुताबिक भ्रष्टाचार की जिन धाराओं में आजम खान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है, उनमें आजीवन कारावास तक का प्रविधान है। ऐसे में उन्हें स्थानीय स्तर पर जमानत मिलना आसान नहीं होगा। इन परिस्थितियों में आजम को फिर हाईकोर्ट का रुख करना पड़ेगा।