अयोध्या [आनंदमोहन]। रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के केंद्र में रहे मुगल शासक बाबर के सेनापति मीर बाकी की मजार कहीं और नहीं अयोध्या के निकट सहनवा गांव में हैं। अब जबकि इस मसले का फैसला सुप्रीम कोर्ट से आने को है, यह गांव और मजार भी चर्चा में है। 

सहनवां गांव पूराबाजार ब्लॉक की ग्राम पंचायत है। जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी मजार देखने से यह नहीं लगता कि ये उसी मीर बाकी की है, जिसकी वजह से पांच सौ वर्ष पुराना विवाद देश झेल रहा है। यहां के निवासी अधिवक्ता रजी हसन अपने कुनबे का सजरा मीर बाकी की बेटी से जोड़ते हैं। सुबूत में सजरा सन 1528 से सन 2017 तक का दिखाते हैं, जिसमें उनका नाम भी है। यही नहीं, 28 दिसंबर 1990 को नबी हसन (पिता) के नाम आए पत्र को भी सुबूत के तौर पर दिखाने से नहीं चूकते। अधिवक्ता रजी हसन के पिता अब नहीं हैं। यह पत्र आल इंडिया शिया कांफ्रेंस के प्रेसीडेंट अंजुम कदीर का है, जिन्हें विवाद के समाधान के लिए आयोजित कांफ्रेंस में बुलाया गया था। यह कांफ्रेस 12 जनवरी 1991 को अशोका होटल नई दिल्ली में आयोजित हुई थी।

कांफ्रेंस के लिए आए पत्र में जस्टिस से लेकर विभिन्न क्षेत्रों के तमाम नामचीनों का नाम है। अधिवक्ता रजी इसी आधार पर बाबर के सेनापति मीर बाकी का नाम सहनवां से जोड़ते हैं। वह दावा करते है कि अयोध्या विवाद पर पुस्तक लिखने के लिए बिहार धर्मादा बोर्ड ट्रस्ट के चेयरमैन किशोर कुणाल भी आ चुके हैं। उनसे मिलकर मजार का सच जानने के लिए कई सवाल भी किए थे। ग्राम प्रधान अंसार अहमद बताते हैं कि बाबर के सेनापति मीर बाकी की मजार होने की अक्सर चर्चा होती है।

 

Posted By: Anurag Gupta

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