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टेरर फंडिंग मामले में लखीमपुर खीरी से चार अभियुक्त गिरफ्तार, भारतीय व नेपाली मुद्रा बरामद

टेरर फंडिंग मामले में एटीएस ने लखीमपुर खीरी से चार ने युवकों को गिरफ्तार किया है। रकम नेपाल से लाई जा रही थी।

By Umesh TiwariEdited By: Published: Fri, 11 Oct 2019 03:38 PM (IST)Updated: Fri, 11 Oct 2019 04:05 PM (IST)
टेरर फंडिंग मामले में लखीमपुर खीरी से चार अभियुक्त गिरफ्तार, भारतीय व नेपाली मुद्रा बरामद

लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में आतंकवाद की जड़ें मजबूत करने के लिए नेपाल के जरिये बड़े पैमाने पर टेरर फंडिंग हो रही थी। पुलिस ने आतंकी गतिविधियों में लिप्त ऐसे चार युवकों को लखीमपुर खीरी से गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से 4.75 लाख भारतीय रुपये व 1.35 लाख नेपाली रुपये बरामद हुए हैं।

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डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि इस प्रकरण की जांच आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) को सौंपी गई है। नेपाल में बीते दिनों 49 लाख रुपये के बैंक फ्राड की घटना के तार भी टेरर फंडिंग के इस गिरोह से जुड़े हैं। डीजीपी ने बताया कि लखीमपुर पुलिस ने नेपाल से अवैध ढंग से लाखों रुपये मंगाकर आतंकियों तक पहुंचाने वाले गिरोह के सक्रिय सदस्य लखीमपुर निवासी उम्मेद अली, संजय अग्रवाल, एराज अली व बरेली निवासी समीर सलमानी उर्फ सोनू को गुरुवार देर शाम गिरफ्तार किया। आरोपितों के खिलाफ लखीमपुर के निघासन थाने में एफआइआर दर्ज की गई है।

शुरुआती पूछताछ में चारों ने बताया कि वे लखीमपुर के डांगा गांव निवासी मुमताज, बरेली के इज्जतनगर थानाक्षेत्र के निवासी फहीम, सिराजुद्दीन व सदाकत अली के लिए कमीशन पर बतौर एजेंट काम करते हैं। नेपाल के बैंकों में कई देशों से मोटी रकम जमा कराई जाती थी, जिसे संबंधित खाता धारक को पांच प्रतिशत कमीशन देकर शेष रकम निकालकर टेरर फंडिंग की जाती थी। 

डीजीपी ने बताया कि उम्मेद, संजय, समीर व एराज नेपाली मुद्रा को लेकर आते थे और भारत की सीमा पर कमीशन देकर नेपाली मुद्रा को भारतीय मुद्रा में बदला जाता था। मुद्रा बदलवाने में संजय अग्रवाल की मुख्य भूमिका होती थी। आरोपित मुद्रा बदलने के बाद उसे बरेली निवासी फईम व सदाकत को पहुंचाते थे। फईम व सदाकत रकम को दिल्ली में बैठे अपने आका को पहुंचाते थे, जहां से रकम देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त युवकों तक पहुंचाई जाती थी। 

नेपाल के बैंक में हुए लाखों का खेल 

डीजीपी का कहना है कि राष्ट्र बैंक नेपाल, जनकपुर को हैक कर 49 लाख रुपये नेपाल के कृषि विकास बैंक, भजनी में ट्रांसफर किये गए थे। यह रकम नेपाल निवासी विजय सिंह मधेसी व चंद्र बुड्ढा के खातों में ट्रांसफर की गई थी, जिन्हें नेपाल पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। दोनों ने पूछताछ में मुमताज का नाम लिया था, जिसके बाद से नेपाल पुलिस भी मुमताज की तलाश कर रही है। 

रिमांड पर लेकर होगी पूछताछ 

डीजीपी का कहना है कि नेपाल के बैंक खातों में रुकम कहां से और किन लोगों के जरिये आती थी। मुमताज के सहयोगी और नेपाल के नेटवर्क में कौन-कौन लोग हैं। फहीम व सदाकत ने टेरर फंडिंग की रकम किन लोगों को पहुंचाई और रकम किस तरह की आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल की जा रही थी। एटीएस इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से पड़ताल करेगी। चारों आरोपितों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। 

बैंक हैक करने की बात नहीं उतर रही गले 

नेपाल में बैंक हैक कर किस तरह 49 लाख रुपये हड़पे गए, फिलहाल खुफिया एजेंसियों के गले यह बात नहीं उतर रही। नेपाल पुलिस से संपर्क कर कई जानकारियां मांगी जा रही है। खुफिया तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है।


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