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जन्म शताब्दी वर्ष के समारोह में योगी आदित्यनाथ बोले-निरंकुश सरकार ने गोलियां चलवाईं, अशोक सिंघल शेर की तरह डटे रहे

Published: Sun, 27 Sep 2026 06:55 PM (IST)

Yogi Adityanath: योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अशोक सिंघल का ध्येय एक ही था, सनातन धर्म को आंच नहीं आने देंगे, उसकी सुरक्षा से किसी को छेड़छाड़ नहीं करने देंगे।

अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के समारोह में गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ

अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के समारोह में गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ

HighLights

  1. गोरक्ष पीठाधीश्वर के रूप में पहुंचे योगी आदित्यनाथ, लोगों में भरा जोश

  2. जो काम उस समय की सरकारें नहीं कर सकीं, उसे अशोक सिंघल किया: योगी आदित्यनाथ

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विश्व हिंदू परिषद ने अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष उद्घाटन समारोह में गोरक्ष पीठाधीश्वर के रूप में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया था। उनके मंच पर पहुंचने पर ऑडिटोरियम जयश्रीराम के नारे लगने लगे।

लखनऊ के सिटी मांटेसरी स्कूल के ऑडिटोरियम में अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के समारोह में गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राममंदिर आंदोलन के समय लोग कफन बांधे रहते थे। उन्होंने कहा कि जब दो नवंबर, 1990 को राम नाम की धुन गाते हुए 'रामभक्तों' पर बर्बर लाठी चार्ज और गोलियों की बौछार होती है, तब उसका मुकाबला करने के लिए कोई सीना तानकर सामने आया था, तो वह नाम था- श्रद्धेय अशोक सिंघल जी का।

जब निरंकुश सरकार ने गोलियां चलवाईं तब पर भी अशोक सिंघल शेर की तरह डटे रहे। ‍उस समय सिंघल जी के प्रोत्साहन से लोग तो मर-मिटने को तैयार थे। उन्हें एक नेतृत्व की जरूरत थी। वह नेतृत्व अशोक सिंघल ने दिया। शासन-सत्ता निरंकुश थी। राम मंदिर के लिए आंदोलन करने वालों पर गोलियां चलवाईं। उस निरंकुश सत्ता के सामने अशोक सिंघल की शेर की तरह डटे रहे।

राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो काम उस समय की सरकारें नहीं कर सकीं, उसे अशोक सिंघल किया। उन्होंने कई जगह एकल विद्यालय बनवाए। उन विद्यालयों में आदिवासियों के बच्चे पढ़ते हैं।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कराना चाहते हैं कुछ नकलची

योगी आदित्यनाथ ने कहा- हमने अशोक सिंघलजी के सान्निध्य में गोसेवा का जो काम सीखा था, उसे धरातल पर उतार रहे हैं। अरे गो-संरक्षण का सवाल करना है, तो उन लोगों से करो, जिन्होंने अवैध बूचड़खाने चलवाए थे। उत्तर प्रदेश के अंदर अवैध बूचड़खानों में गोमाता कटती थीं। हम लोगों ने 2017 में अवैध बूचड़खाने पूरी तरह बंद कराए। 2017 के बाद यूपी में 7700 गोशालाएं बनवाईं। उन गोशालाओं में 16 लाख से अधिक गाय रखकर उनका संरक्षण कर रहे हैं। हर गाय के ऊपर 1500 रुपये हर महीने उपलब्ध यूपी सरकार की ओर से कर रहे हैं, जिससे गोमाता का संरक्षण हो सके।

नकलची कभी-कभी ज्ञापन देने निकलते

कुछ नकलची कभी-कभी ज्ञापन देने निकलते हैं। वो कहते हैं कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। अरे, पशुवत तुम्हारी सोच है, जो गाय को पशु घोषित कराना चाहते हो। गाय तो हमारी माता है। वह पशु नहीं है। उन्होंने कहा कि याद रखना बजरंगियो, आप सबसे कहना चाहता हूं कि गोरक्षा भाषण या सड़कों पर आंदोलन का विषय नहीं है।

एक ही ध्येय था- सनातन की सुरक्षा से छेड़छाड़ नहीं

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अशोक सिंघल का ध्येय एक ही था, सनातन धर्म को आंच नहीं आने देंगे, उसकी सुरक्षा से किसी को छेड़छाड़ नहीं करने देंगे। यह वर्ष हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण वर्ष है। सन 1528 ने अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर प्रभु राम के मंदिर को तोड़कर एक विदेशी आक्रांता ने वहां गुलामी का ढांचा बना दिया। 500 वर्षो ने कोई कालखंड ऐसा नही बीता जब हिंदू समाज चुप बैठा हो,धर्माचार्य लड़ते रहे, बलिदान देते रहे। संतों, नागाओं, सिक्ख वीरों, भारत के राजाओं, नागरिकों, नारियों ने निरंतर सिर पर कफन बांधे रखा। श्रीरामजन्मभूमि के मुक्ति के लिए टूट पड़ते थे।

शिलान्यास के समय सिंघल ने धर्माचार्यों को किया आगे

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा कि समाज में जो विषमताएं और आचरण के दोष आए हैं, वे धर्म की सीख नहीं हैं। पूज्य संतों ने इन दोषों को दूर करने के लिए प्रयास किए। अशोक सिंघल इस काम के अग्रदूत थे। उन्होंने सामाजिक समरसता को केवल प्रतीकात्मक विषय नहीं रहने दिया, बल्कि व्यवहार में उतारने का प्रयास किया। उन्होंने राम जन्मभूमि मंदिर के शिलान्यास का प्रसंग याद करते हुए कहा कि सैकड़ों वर्षों के संघर्ष और बलिदान के बाद जब शिलान्यास का अवसर आया, तब अनेक जगद्गुरु और धर्माचार्य उपस्थित थे। इसके बावजूद अशोक सिंघल ने आग्रह किया कि शिलान्यास कामेश्वर चौपाल के हाथों से कराया जाए। यह हिंदू समाज की सोच और आचरण में बदलाव का महत्वपूर्ण उदाहरण था।

सेवा कार्य और जनजातीय क्षेत्रों में विस्तार पर जोर

मिलिंद परांडे ने कहा कि अशोक सिंघल ने विश्व हिंदू परिषद के माध्यम से सेवा कार्यों को बढ़ावा दिया। जनजातीय क्षेत्रों में एकल विद्यालय जैसे प्रयासों को विस्तार देने के लिए उन्होंने देश-विदेश में प्रवास किया और लोगों को इन कार्यों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि धर्म से दूर हो रहे लोगों को समझाने और उन्हें वापस अपने धर्म से जोड़ने के लिए भी अशोक सिंघल ने व्यापक प्रयास किए। उनके लिए धर्म, समाज और संस्कृति की रक्षा केवल भाषण का विषय नहीं था, बल्कि वे स्वयं मैदान में उतरकर काम करते थे। समारोह में विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे भी शामिल हुए। इनके अलावा, लखनऊ के मनकामेश्वर महादेव मंदिर की महंत देव्या गिरि और मंदिरों-गुरुद्वारों के प्रमुख भी बुलाए गए थे।

कौन थे अशोक सिंघल

अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से धातुकर्म इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और 1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। बाद में संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बने। 1980 में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में जिम्मेदारी मिली। 1984 में वे संगठन के महासचिव बने और बाद में अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका निभाई। अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होती थी। आंदोलन के दौरान कारसेवा और राम मंदिर निर्माण के लिए जनसमर्थन जुटाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। 17 नवंबर 2015 को गुरुग्राम में उनका निधन हो गया था।

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