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मायावती के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और समधी से ‘सियासी दुश्मन’ बने अशोक सिद्धार्थ, कैसे आई रिश्तों में खटास?

Published: Fri, 11 Sep 2026 07:57 AM (IST)

बसपा प्रमुख मायावती के समधी अशोक सिद्धार्थ अब उनके 'सियासी दुश्मन' बन गए हैं। दिल्ली चुनाव में हार के बाद ...और पढ़ें

अशोक सिद्धार्थ, आकाश आनंद और बसपा सुप्रीमो मायावती।

अशोक सिद्धार्थ, आकाश आनंद और बसपा सुप्रीमो मायावती।

HighLights

  1. मायावती के समधी अशोक सिद्धार्थ अब उनके सियासी दुश्मन बने।

  2. दिल्ली चुनाव में हार के बाद बसपा से निष्कासित हुए।

  3. पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण मायावती ने की कड़ी कार्रवाई।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधायक(विधान परिषद सदस्य) से सांसद(राज्यसभा सदस्य) तक रहे अशोक सिद्धार्थ बसपा प्रमुख मायावती के समधी से अब ‘सियासी दुश्मन’ बन गए हैं।

पार्टी में बहनजी के बेहद करीबी माने जाने वाले अशोक की पत्नी सुनीता जहां बसपा सरकार के दौरान राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष रही हैं वहीं तीन वर्ष पहले उनकी बेटी डॉ. प्रज्ञा सिद्धार्थ का विवाह मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद से कराया था।

मायावती ने अशोक का कद बढ़ाते हुए उन्हें कई राज्यों की कमान भी सौंपी। हालांकि, दिल्ली विधानसभा चुनाव में बसपा की करारी हार के बाद रिश्तों में खटास आई। बसपा प्रमुख ने अशोक के प्रति नाराजगी जताते हुए उन्हें पार्टी से ही निष्कासित कर दिया।

मायावती द्वारा समधी अशोक पर की गई कड़ी कार्रवाई के पीछे गुटबाजी और पार्टी विरोधी गतिविधियों को वजह बताया गया। ससुर अशोक पर नाराजगी का असर आकाश पर भी पड़ा और उन्हें भी पद गंवाने के साथ ही पार्टी से बाहर का रास्ता देखना पड़ा।

मायावती ने खुद कहा था कि आकाश पर अपने ससुर व उनकी पत्नी का प्रभाव था, जो पार्टी के लिए सकारात्मक नहीं है। अशोक को गलतियां सुधारने के कई मौके दिए लेकिन वह पार्टी के मिशन से ज्यादा निजी और पारिवारिक स्वार्थों को अहमियत देते रहे।

गुरुवार को अगर-मगर के साथ राजनीति से संन्यास लेने वाले लगभग 61 वर्षीय अशोक झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कालेज से डिप्लोमा करने के बाद स्वास्थ्य विभाग में नौकरी कर चुके हैं।

कन्नौज में नौकरी करते कर्मचारी संगठन में सक्रियता के दौरान वह बसपा प्रमुख के संपर्क में आए थे। मायावती के कहने पर नौकरी छोड़ वह पार्टी के लिए काम करने लगे। वर्ष 2009 में बसपा सरकार में अशोक को छह वर्ष के लिए एमएलसी बनाया गया। वर्ष 2015 में कार्यकाल खत्म होने के बाद जुलाई 2016 में अशोक को मायावती ने छह वर्ष के लिए राज्यसभा भेजा था।

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