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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 12, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

यूपी के सरकारी अस्पतालों को भेजे जाने वाले एंटीबायोटिक इंजेक्शन जांच में फेल, सप्लाई पर लगाई गई रोक

By Ashish Kumar TrivediEdited By: Umesh Tiwari
Published: Wed, 12 Oct 2022 12:22 AM (IST)

UP News बैक्टिरियल इंफेक्शन से बचाने के लिए यह एंटीबायोटिक एमोक्सिसिलिन इंजेक्शन लगाया जाता है। ये इंजेक्शन प्रयोगशाला की जांच ...और पढ़ें

UP News: ड्रग वेयर हाउस ने एमोक्सिसिलिन इंजेक्शन की आपूर्ति पर लगाई रोक।
UP News: ड्रग वेयर हाउस ने एमोक्सिसिलिन इंजेक्शन की आपूर्ति पर लगाई रोक।

UP News: लखनऊ, राज्य ब्यूरो। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में दवा आपूर्ति की बदली व्यवस्था से सरकारी अस्पतालों तक घटिया एंटीबायोटिक एमोक्सिसिलिन इंजेक्शन नहीं पहुंच सका जिससे मरीजों की जान पर आफत नहीं आई। अस्पतालों को आपूर्ति से पहले यूपी मेडिकल सप्लाईज कारपारेशन लिमिटेड द्वारा खरीदे गए इंजेक्शन प्रयोगशाला की जांच में मानकों के मुताबिक नहीं पाए गए हैं। जांच में फेल होने पर कारपोरेशन ने प्रदेशभर के ड्रग वेयर हाउस से एमोक्सिसिलिन इंजेक्शन की अस्पतालों को आपूर्ति रोक दी है। सभी इंजेक्शन को वापस मंगाने के साथ ही आपूर्ति करने वाली फर्म को नोटिस दी जा रही है।

कंपनी को वापस होंगे इंजेक्शन

बैक्टिरियल इंफेक्शन से बचाने के लिए यह एंटीबायोटिक एमोक्सिसिलिन इंजेक्शन लगाया जाता है। मेडिकल सप्लाईज कारपारेशन के मुताबिक दो दिसंबर 2021 को अमृतसर की एएनजी लाइफ साइंस इंडिया लिमिटेड द्वारा जो एमोक्सिसिलिन इंजेक्शन आपूर्ति किए गए। उनमें बैच नंबर एबी 192054 के इंजेक्शन प्रयोगशाला की जांच में मानकों पर खरे नहीं पाए गए हैं। ऐसे में राज्य के 54 जिलों के ड्रग वेयर हाउस में आपूर्ति किए गए इंजेक्शन वापस मंगाकर कंपनी को लौटाए जाएंगे।

डिप्टी सीएम दे चुके हैं ये निर्देश

जिन 54 जिलों के ड्रग वेयर हाउस में यह इंजेक्शन भेजा गया है, उसके संबंधित बैच नंबर के एमोक्सिसिलिन इंजेक्शन छांटकर अलग करने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में सरकारी अस्पतालों में घटिया दवा व इंजेक्शन की आपूर्ति के मामले सामने आने पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने ड्रग वेयर हाउस में दवा व इंजेक्शन पहुंचने पर ही उनकी जांच कराए जाने के निर्देश दिए हैं। प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट सही आने पर ही अब उन्हें अस्पतालों में आपूर्ति किया जा सकता है।

मरीजों नहीं लगे फेल इंजेक्शन

पहले ड्रग वेयर हाउस से दवा व इंजेक्शन अस्पताल पहुंच जाते थे। बाद में जांच में फेल होने पर खराब दवा व इंजेक्शन से मरीजों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती थी। बदली व्यवस्था का ही नतीजा रहा कि जांच में फेल एमोक्सिसिलिन इंजेक्शन लगने के लिए मरीजों तक नहीं पहुंच सके।

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