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हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, UP के 4 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण पर लगाई रोक

Published: Thu, 17 Sep 2026 05:54 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने अंबेडकरनगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस दाखिले के ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. यूपी के चार मेडिकल कॉलेजों में 91% आरक्षण पर रोक।

  2. एससी, एसटी, ओबीसी के लिए 21, 2, 27% आरक्षण पर काउंसलिंग।

  3. चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को नोटिस जारी।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने नीट-यूजी के तहत एमबीबीएस दाखिले के लिए अंबेडकरनगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन के सरकारी मेडिकल कालेजों में करीब 91 प्रतिशत आरक्षण लागू किए जाने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को 21 प्रतिशत एससी, दो प्रतिशत एसटी और 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के आधार पर काउंसलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी है।

काउंसलिंग और इसके आधार पर होने वाले दाखिले कोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन रहेंगे।न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने बुधवार को मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एएन त्रिपाठी ने कहा कि पिछले वर्ष सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अगले शैक्षणिक सत्र से आरक्षण व्यवस्था को वैधानिक प्रविधानों के अनुरूप करने का आश्वासन दिया था।

इसके बावजूद मौजूदा शैक्षणिक सत्र में चारों कालेजों की राज्य कोटे की सीटों पर ऐसी व्यवस्था लागू की गई, जिससे कुल आरक्षण करीब 91 प्रतिशत हो गया। याचिका में चारों सरकारी मेडिकल कालेजों में नीट-यूजी की राज्य कोटे की सीटों पर इस व्यवस्था को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 91 प्रतिशत आरक्षण पर रोक लगा दी, लेकिन छात्रों की काउंसलिंग पूरी तरह रोकने के बजाय एससी के लिए 21 प्रतिशत, एसटी के लिए दो प्रतिशत और ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी।

कोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है। उनसे पूछा गया है कि पिछले वर्ष अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासन के उल्लंघन पर उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। मामले में आगे की सुनवाई में आरक्षण व्यवस्था को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।

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