दो घंटे में लखनऊ… चार में पटना, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने पकड़ी स्पीड, NHSRCL ने जारी की ग्लोबल आरएफपी
नेशनल हाई स्पीड रेल कारपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने लखनऊ से गुजरने वाले दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को जमीन पर उतारने की तैयारी तेज कर दी है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
NHSRCL ने दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की तैयारी तेज की।
कंसल्टेंसी एजेंसी के चयन हेतु ग्लोबल आरएफपी जारी की गई।
लखनऊ को बुलेट ट्रेन परियोजना का महत्वपूर्ण जंक्शन बनाया जाएगा।
निशांत यादव, लखनऊ। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को अंतिम रूप देने में लगे नेशनल हाई स्पीड रेल कारपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने अब लखनऊ होकर गुजरने वाले दिल्ली-सिलीगुड़ी कॉरिडोर को जमीन पर उतारने की तैयारी तेज कर दी है।
जल्द छह साल के लिए कंसल्टेंसी एजेंसी का चयन कर सर्वे के आधार पर हाईस्पीड ट्रेनों के सिविल कार्य से जुड़े कामों की लागत का आंकलन कर डीपीआर तैयार बनाने में सहयोग करेगी एजेंसी को दो साल में डिजाइन तैयार करना होगा, शेष चार साल एडवाइजर की भूमिका में होगी। पिछले दिनों एनएचएसआरसीएल ने दो चरणों में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए जमीनी सर्वे कराया था।
आरएफपी के आधार पर होगा चयन
एनएचएसआरसीएल के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अगले माह के पहले सप्ताह तक बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का अनुभव रखने वाली कंसल्टेंट एजेंसी का चयन ग्लोबल टेंडर निकालकर रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) के आधार पर होगा। चयनित एजेंसी को ब्रिज, पटरी, स्टेशन सहित सभी सिविल निर्माण की डिजाइन तैयार करना होगा। साथ ही एजेंसी पूरे कॉरिडोर की डिजाइन बेसिस रिपोर्ट भी तैयार करेगी।
चयनित एजेंसी एलाइनमेंट के लिए किए गए जमीनी सर्वे के आधार पर दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की मेन लाइन, नदी सहित सभी क्रासिग ब्रिज, स्टील ब्रिज, डिपो, मेंटेनेंस डिपो, एप्रोच लाइन, फीडर सेक्शन, स्पैन, रास्ते में पड़ने वाले सभी स्टेशनों की बिल्डिंग की डिजाइन तैयार करेगी।
कारपोरेशन ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के मानकों के आधार पर तैयार विवरण के साथ जो आरएफपी मांगी है, उसमें एजेंसी को 320 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से बुलेट ट्रेन दौड़ाने के लिए डबल लाइन के कॉरिडोर को डिजाइन करना होगा। तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर के लिए हाई स्पीड रेल के कोड की डिजाइन अमेरिकी, जापानी, चीन और यूरो के अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर तैयार होगी।
415 मीटर का होगा प्लेटफार्म
बुलेट ट्रेन का प्लेटफार्म 415 मीटर का होगा। हर स्टेशन पर एक आइसलैंड प्लेटफार्म होगा। एक लाइन के दोनों ओर यात्री उतर और चढ़ सकेंगे। स्टेशन बिल्डिंग का ब्लॉक 425 मीटर का होगा। भूमिगत सुरंग की डिजाइन भी इस तरह तैयार की जाएगी कि 350 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से बुलेट ट्रेन गुजर सकेगी।
चयन की तिथि से तीन माह के भीतर भूमिगत सुरंग की डिजाइन तैयार होगी। डिजाइन बेसिस रिपोर्ट चार माह में, भूमिगत स्टेशन, सुरंग और अर्थ स्ट्रक्चर के लिए पांच महीने, तकनीकी स्पेशिफिकेशन, जनरल अरेंजमेंट डिजाइन के लिए छह माह और फाइनल डिजाइन 12 माह में तैयार होगी।
जमीनी सर्वे में ऐसी बनी तस्वीर
पिछले दिनों एलाइनमेंट के लिए जो जमीनी सर्वे किया गया है, उसकी प्रारंभिक रिपोर्ट एनएचएसआरसीएल को सौंप दी गई है। एनएचएसआरसीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक दिल्ली-सिलीगुड़ी कॉरिडोर दो चरणों में पूरा होगा।
पहला चरण दिल्ली से लखनऊ होकर वाराणसी तक 756 किलोमीटर और दूसरा वाराणसी से सिलीगुड़ी तक 744 किलोमीटर का होगा। दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, इटावा, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और भदोही होते हुए बुलेट ट्रेन वाराणसी तक जाएगी।
इतनी दूरी इतने समय में तय करेगी बुलेट ट्रेन
| रूट | समय |
| दिल्ली से लखनऊ | 2:12 घंटा |
| दिल्ली से वाराणसी | 3:50 घंटा |
| वाराणसी से सिलीगुड़ी | 2:55 घंटा |
| पटना से सिलीगुड़ी | 2:00 घंटा |
| दिल्ली से पटना | 4:41 घंटा |
| दिल्ली से सिलीगुड़ी | 6:45 घंटा |
लखनऊ बनेगा जंक्शन
यह देश का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट होगा, जिसमें एक जंक्शन बनाया जाएगा। लखनऊ को जंक्शन के रूप में विकसित किया जाएगा। लखनऊ से बुलेट ट्रेन का एक कॉरिडोर अयोध्या को भी जोड़ेगा।
