लखनऊ, [अजय जायसवाल]। यूपी में एक दौर ऐसा भी रहा है जब दो-तीन वर्ष के अंतराल पर विधानसभा के मध्यावधि चुनाव हुए। ऐसे उतार-चढ़ाव के दौर में भी कुछ ऐसे सूरमा रहे जिन्हें जनता का प्यार सदैव मिलता रहा और वह बार-बार चुनकर विधानसभा में पहुंचते रहे। अबकी भी ऐसे ही कई पहलवान फिर चुनावी दंगल में उतरते दिख रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैैं आजम खां जो दसवीं जीत के लिए मैदान में उतरेंगे। फिलहाल वह जेल में बंद हैैं।

चार योद्धा चाहते हैं नौवीं जीत : सूबे में चार सूरमा ऐसे दिख रहे हैं जो नौवीं बार अपनी किस्मत आजमाने जा रहे हैं। इनमें योगी सरकार में मंत्री सुरेश कुमार खन्ना भी हैं। एक ही पार्टी और एक ही झंडे तले शाहजहांपुर की जनता उन्हें लगातार आठ बार चुन चुकी है। इसी तरह लोकतंत्र सेनानी वरिष्ठ समाजवादी नेता राम गोविन्द चौधरी नौवीं जीत के लिए बलिया से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने को तैयार हैं। 1989 में पहली बार विधायक बने पूर्व मंत्री श्याम सुंदर शर्मा मथुरा के मांट से पिछली बार बसपा के टिकट पर मात्र 432 मतों के अंतर से आठवीं बार जीते थे। शर्मा एक बार फिर बसपा से ही चुनाव मैदान में हैं। इसी तरह आजमगढ़ से सपा विधायक दुर्गा प्रसाद यादव भी आठ बार के विधायक हैं और नौवीं बार विधानसभा पहुंचने के लिए चुनाव लड़ते दिख रहे हैं।

आठवीं जीत के लिए बेकरार : कई विधायक आठवीं बार विधानसभा में पहुंचने की तैयारी में हैं। योगी सरकार में औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना कानपुर की महाराजपुर सीट से मैदान में उतर चुके हैं। गोंडा की सुरक्षित सीट मनकापुर से भाजपा विधायक रमापति शास्त्री योगी सरकार में समाज कल्याण मंत्री हैं। 2017 में में पहली बार मंत्री बने जय प्रताप सिद्धार्थनगर की बांसी सीट से विधायक हैं। 1985 में पहली बार विधानसभा पहुंचे रामपाल वर्मा को हरदोई की बालामऊ सुरक्षित सीट से एक बार फिर भाजपा ने चुनाव मैदान में उतारा है। मल्हनी सीट से सपा विधायक पारसनाथ का निधन हो चुका है। वह भी सात बार जीते थे।

सातवीं बार जीत की चुनौती : कुंडा से छह बार के निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह सातवीं बार विधानसभा में पहुंचने के लिए चुनाव लडऩे को तैयार हैं। रघुराज कल्याण, राम प्रकाश व राजनाथ सिंह की सरकार के अलावा मुलायम और अखिलेश की सरकार में भी मंत्री रहे हैं। फतेह बहादुर वर्तमान में गोरखपुर की कैंपियरगंज सीट से भाजपा विधायक हैं। छह बार के विधायक फतेह बहादुर भाजपा व बसपा सरकार में मंत्री तथा 17 वीं विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर रहे हैं। गोंडा के कर्नलगंज से छह बार के भाजपा विधायक अजय प्रताप सिंह, महमूदाबाद सीट से छह बार के सपा से विधायक नरेंद्र सिंह वर्मा, संभल से सपा विधायक इकबाल महमूद सातवीं जीत के लिए उतरेंगे।

वर्तमान में पहली बार के हैं दो-तिहाई सदस्य : 17वीं विधानसभा के लिए 2017 में हुए चुनाव में 16वीं विधानसभा के तीन-चौथाई से ज्यादा विधायक जहां सदन में वापसी नहीं कर सके थे, वहीं तकरीबन दो-तिहाई विधायकों ने पहली बार विधानसभा की दहलीज पार की थी। 403 विधायकों में पहली बार 239 विधानसभा के सदस्य चुने गए थे। इनमें सर्वाधिक भाजपा के 215 विधायक थे। विभिन्न कारणों से हुए उपचुनाव के बाद वर्तमान में 260 सदस्य ऐसे हैं जो पहली बार विधायक बने हैं।

दो दशक बाद भी कल्याण का रिकार्ड बरकरार : राजस्थान के राज्यपाल और यूपी के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह अब हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन सर्वाधिक 10 बार विधायक बनने का उनका रिकार्ड दो दशक बाद भी कोई तोड़ नहीं सका है। पहली बार जनसंघ से 1967 में विधायक बने कल्याण सिंह 14वीं विधानसभा के लिए दसवीं बार चुने गए थे। जीवनभर भाजपा के साथ रहे कल्याण, अंतिम विधानसभा चुनाव 2002 में अपनी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से जीते थे। पिछले चार चुनाव के बाद अब 18वीं विधानसभा के लिए हो रहे चुनाव में उतरने और जीतने पर भी आजम केवल कल्याण की बराबरी कर सकेंगे। कल्याण के रिकार्ड की बराबरी के लिए उन्हें एक और विधानसभा का चुनाव जीतना होगा। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी नौ बार ही विधायक रहे। मुलायम भी कल्याण के साथ 1967 में पहली बार विधायक बने थे।

Edited By: Vikas Mishra