बाराबंकी, जेएनएन। विधायक मुख्तार अंसारी की एंबुलेंस प्रकरण में मऊ जिले की डा. अलका राय व डा. शेषनाथ राय की जमानत अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। प्रभारी सेशन न्यायाधीश बालकृष्ण एन रंजन ने जमानत अर्जी खारिज कर दी। जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश कुमार पांडेय ने न्यायालय में सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि डाॅ अलका राय का परिचय मुख्तार अंसारी से था। उसने अपने श्याम संजीवनी हास्पिटल के लिए एंबुलेंस का पंजीयन करवाने में बाराबंकी में फर्जी पते पर पंजीयन कराने का काम किया था, जोकि मुख्तार अंसारी के लिए पंजाब में प्रयोग हो रही थी।

शासन स्तर पर कराई गई जांच में निर्वाचन कार्ड पूर्णतया फर्जी और जालसाजी करके बनाए जाने की पुष्टि हुई थी। रफी नगर मोहल्ला के मकान संख्या 56 के आधार पर एंबुलेंस का पंजीकरण एआरटीओ दफ्तर में करवाया गया था। वह उस जगह नहीं बल्कि उसके निकट मोहल्ला अभय नगर में मकान संख्या 56 स्थित है, जिसमें प्रदीप मिश्रा का परिवार वर्षों से रह रहा है। इससे यह स्पष्ट है कि जो एंबुलेंस यूपी 41 एटी 7171 जो उक्त पते पर पंजीकृत कराई गई वह पता फर्जी है।

बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि आरोपित निर्दोष हैं। एफआइआर गलत तरीके से पंजीयन संभागीय परिवहन अधिकारी बाराबंकी की ओर से राजनीतिक दबाव में लिखाई गई। परिवहन अधिकारी को केवल पंजीकृत नोटिस देकर सुनवाई के बाद वाहन का पंजीकरण निरस्त करने का अधिकार एमवी एक्ट 1988 की धारा 55(5) अनुसार ही है। रिपोर्ट दर्ज कराने का अधिकार नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि अभियुक्तगण पेशे से डाक्टर हैं और जनता की सेवा करते हैं। 

Edited By: Anurag Gupta