लखनऊ, जेएनएन। घुटनों व मांसपेशियों में होने वाले जटिल व पुराने दर्द को अब आयुर्वेदिक अलाबू विधि से दूर किया जा सकेगा। टुडिय़ागंज स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय एवं महाविद्यालय के डॉक्टरों को अलाबू विधि का प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, जटिल दर्द के मरीज को 15 दिन से एक महीने तक प्रतिदिन 30 से 45 मिनट इलाज करने से दर्द दूर हो जाता है। शरीर पर इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। यह विधि भी दूसरी विधाओं की तरह सेफ है। 

शनिवार को अस्पताल परिसर में काय चिकित्सा विभाग की ओर से पहली बार दर्द प्रबंधन पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में आयुर्वेद की अलाबू विधि के जरिये विशेषज्ञों ने शरीर के जटिल दर्द दूर करने के तरीके बताए। उद्घाटन मुख्य अतिथि विशेष सचिव आयुष, आरएन वाजपेई सहित आयुर्वेद निदेशक डॉ. एसएन सिंह, चिकित्सालय के प्रधानाचार्य डॉ. प्रकाश चंद्र सक्सेना व डॉ. कमल सचदेवा ने किया। 

कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता डॉ. शिशिर व डॉ. अब्दुल कवी ने 100 से अधिक डॉक्टरों व अन्य विशेषज्ञों को अलाबू विधि सहित कपिंग विधि भी सिखाई। 

लौकी काटकर बनाया जाता है अलाबू यंत्र

चिकित्सा अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र ने बताया कि शरीर में 107 प्रकार के मर्म होते हैं। कफ से दूषित होने वाले खून को अलाबू विधि से निकाला जाता है। अलाबू एक प्रकार का यंत्र है, जो लौकी को काटकर बनाया जाता है। इस यंत्र से शरीर में दूषित रक्त का शोधन यानी शरीर से गंदे खून को निकाला जाता है। विशेष रूप से अलाबू विधि से हड्डियों, मांसपेशियों, शिराओं व धमनियों आदि के दर्द का इलाज किया जाता है।

Posted By: Anurag Gupta

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