पश्चिमी UP में नए समीकरण: 10 दिन में सपा प्रमुख से दूसरी बार मिले लोकदल अध्यक्ष, बोले- 2027 में अखिलेश बनेंगे CM
सपा प्रमुख अखिलेश यादव और लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह की 10 दिनों में दूसरी मुलाकात ने पश्चिमी यूपी की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है।
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सपा प्रमुख अखिलेश यादव।
HighLights
अखिलेश यादव और सुनील सिंह की 10 दिन में दूसरी मुलाकात।
लोकदल अध्यक्ष ने 2027 में अखिलेश को सीएम बनाने का लक्ष्य बताया।
सीट बंटवारे और INDI गठबंधन पर भी हुई चर्चा।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधान सभा चुनाव के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ताकत झाेंक रहे सपा प्रमुख अखिलेश यादव की 10 दिन में लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह से दूसरी मुलाकात ने चर्चाएं तेज कर दी हैं। मुलाकात के बाद लोकदल अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2027 में अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाना है, ताकि किसानों, गरीबों, युवाओं आदि के मुद्दों को मजबूती से उठाया जा सके। उन्होंने सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा का भी दावा किया है।
वर्ष 2022 के विधान सभा चुनाव में सपा संग गठबंधन में रहा रालोद अब एनडीए में शामिल है। हाल ही में सपा प्रमुख के चवन्नी को रुपया बनाने वाले बयान के बाद रालोद के साथ जमकर बयानों की जंग चल रही है। इसी तकरार के बीच नौ सितंबर को लोकदल अध्यक्ष ने सपा प्रमुख से मुलाकात की थी।
शुक्रवार को फिर उन्होंने जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट में अखिलेश से मुलाकात की। लोकदल अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस, सपा और लोकदल, इंडी गठबंधन का हिस्सा हैं और लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा।
सपा प्रमुख ने उन्हें आश्वासन दिया कि लोकदल का पूरा सम्मान किया जाएगा। सुनील सिंह ने कहा कि वर्ष 2027 का चुनाव केवल प्रदेश का नहीं, बल्कि देश की दिशा तय करने वाला चुनाव होगा। दावा किया कि सीटों के बंटवारे और लोकदल की 35 सीटों की मांग सहित अन्य राजनीतिक विषयों पर भी बातचीत आगे जारी रहेगी।
दीया जलाने पर अखिलेश ने उठाए सवाल
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सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर हुए आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम पर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को बाराबंकी में बाढ़ संबंधी वीडियो पोस्ट कर लिखा, जब लोगों के घर उजड़ गए हैं, न राहत सामग्री है न कोई पूछने वाला फिर ऐसे में भाजपा उत्सव मनाने का निंदनीय कृत्य कैसे कर रही है। एक अन्य पोस्ट में लिखा, अब तक भाजपा राजनीति का अपराधीकरण कर रही थी। अब भाजपा राजनीति का ‘अधिकारीकरण’ कर रही है।
