लखनऊ (जेएनएन)। पंचतत्व यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु में संतुलन का जीवन पर सीधा प्रभाव है। इनमें से पहले वायु के महत्व को समझते हैं। मनुष्य भोजन व पानी के बिना तो कुछ दिन जीवित रह सकता है लेकिन वायु के बिना वह पांच मिनट भी नहीं रह सकता है। इसके बावजूद भागदौड़ भरी जिंदगी में वायु प्रदूषण को नजरअंदाज करते हैं जबकि वायु प्रदूषण सीधे हमारे जीवन से जुड़ा है। वायु ही विषैली होगी तो हमारा अस्तित्व ही मिट जाएगा। इसी अज्ञानता के कारण हम वातावरण में लगातार जहर घोलते जा रहे हैं।

16 किग्रा यानी 35 गैलन वायु रोज चाहिए
प्रत्येक व्यक्ति एक दिन में 20 से 22 हजार बार सांस लेता है। इस दौरान वह 16 किलोग्राम यानी 35 गैलन वायु का उपयोग करता है। इस वायु में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत ऑक्सीजन, 0.03 प्रतिशत कार्बन डाई ऑक्साइड एवं 0.97 प्रतिशत अन्य की मात्रा होती है। वायु में कार्बन आई ऑक्साइड व नाइट्रोजन के ऑक्साइड की वृद्धि हो जाती है तो ऐसी वायु प्रदूषित हो जाती है। ऐसे में अगर हम दूषित वायु अपने शरीर के अंदर ले जाते हैं तो इससे हमारी जान को खतरा हो सकता है। वायु प्रदूषण प्राकृतिक व मानव जनित स्रोतों से उत्पन्न बाहरी तत्वों के वायु में मिलने के कारण होता है। यही प्रदूषित वायु मानव के साथ ही जीव-जंतुओं एवं वनस्पतियों के लिए भी नुकसान दायक होती है।
वायु प्रदूषण के मुख्य कारण
जाने माने पर्यावरण विशेषज्ञ वेंकटेश दत्ता कहते हैं कि वायु प्रदूषण के दो मुख्य स्रोत हैं। इनमें पहला प्राकृतिक व दूसरा मानवीय है। प्राकृतिक स्रोत में आंधी-तूफान के समय उड़ती धूल, वनों की आग, विभिन्न पदार्थों से निकलने वाली मीथेन गैस, उल्का पिंड का पृथ्वी से टकराने आदि के कारण प्रमुख हैं। वहीं, मानवीय कारणों में घरेलू ईंधन के रूप में लकड़ी का प्रयोग, वाहनों से निकलने वाले धुआं, थर्मल पावर, कृषि अपशिष्ट का जलाया जाना, औद्योगिक इकाइयों द्वारा, भवन निर्माण में उडऩे वाली धूल आदि प्रमुख कारण हैं। 
वायु प्रदूषण का प्रभाव
वायु प्रदूषण के कारण इंसानों के साथ ही प्रकृति पर बहुत बुरे प्रभाव पड़ रहे हैं। ओजोन परत व ग्रीन हाउस पर इसका सीधा नुकसान हो रहा है। वायु प्रदूषण के कारण अम्लीय वर्षा तक हो जाती है। यह वर्षा इंसानों और जानवरों दोनों के लिए काफी खतरनाक होती है। मनुष्यों में निमोनिया, उल्टी, फेफड़े का कैंसर, ब्रोंकाइटिस, सिरदर्द, हृदय रोग, जुकाम, खांसी व आंखों में जलन आदि रोग हो सकते हैं। 
 
बचाव सही आहार का चुनाव
  • विटामिन सी युक्त पदार्थ 
  • साग, धनिया, पालक और गोभी खाएं
  • आंवला, अमरूद, नींबू, संतरा, माल्टा, मौसमी फल का सेवन
  • ओमेगा-3 जैसे अखरोट, सोयाबीन, राई का तेल, सीफूड, हरी पत्तेदार सब्जियां आदि का सेवन
  • विटामिन-ई जैसे सूरजमुखी का तेल, मूंगफली का तेल और जैतून का तेल, बादाम, मछली व लौंग आदि का  नियमित सेवन 
  • मुलेठी, तुलसी, जायफल आदि का प्रयोग
 
इन उपायों से कम हो सकता वायु प्रदूषण 
  • रिहायशी इलाकों से दूर हों कारखाने। इनमें आधुनिक तकनीकों का प्रयोग हो जिससे जहरीला धुआं न निकले। 
  • गाडिय़ों से निकलने वाला धुआं रोकने के लिए सख्ती से कदम उठाएं जाएं। आम जनता को भी इसमें मदद करनी होगी। 
  • धूमपान एक ऐसा वायु प्रदूषण है जो आपके साथ साथ आपके घर के सदस्यों को भी प्रभावित करता है। इसलिए इसे तत्काल छोड़ दें। 
  • गांवों में रोजगार के साधन उपलब्ध हो जाएंगे तो गांव के लोग शहरों की ओर नहीं आएंगे। 
  • धुएं वाले ईंधन जैसे लकड़ी, कोयला आदि का प्रयोग न करें
 
क्या है पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 
वायु प्रदूषण में सबसे अधिक खतरनाक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) होता है। इसका मतलब उन बेहद बारीक कणों से है जो वातावरण में घुलकर प्रदूषण तैयार करते हैं। ये कण इतने छोटे होते हैं कि हमारी नाक के रास्ते से होते हुए न सिर्फ शरीर में बल्कि हमारी रक्तवाहिनियों में भी प्रवेश कर जाते हैं। पीएम विभिन्न आकारों का होता है। यह जितना छोटा होगा, उतनी ही आसानी से रक्तवाहिनियों में पहुंचकर सेहत पर बुरा असर डालता है। चिकित्सा विज्ञान के मुताबिक पार्टिकुलेट मैटर 2.5 और 10 मानव स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।

Posted By: Nawal Mishra