लखनऊ [अजय श्रीवास्तव] । तेल और लेबल नकली और दाम असली। अधिक मुनाफा कमाने के लिए यह धंधा आज भी चल रहा है और लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। जिस सरसों के तेल को अब किसी ब्रांड का समझकर खरीदते थे, हकीकत में उसके डिब्बे पर फर्जी तरह से ब्रांड का लेबल लगाकर बेचा जा रहा था।  बैल कोल्हू ब्रांड एवं मार्क सरसों के तेल के मिलते जुलते ट्रेड मार्क से तेल बेचने वालों के खेल से ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन अपराध अनुसंधान विभाग) की टीम अब पर्दा उठाएगी। शासन ने पुलिस से जांच लेकर ईओडब्ल्यू को सौंपी है और तुरंत रिपोर्ट मांगी है। 

ईओडब्ल्यू ने पूर्व के एक मामले की जांच करते हुए नगर निगम से भी कुछ अभिलेख मांगे हैं। यह जांच वर्ष 2012 में सरोजनीनगर थाने में दर्ज मुकदमे पर की जा रही है। नामचीन ब्रांड का सहारा लेकर सरसों का तेल बेचने वाले नादरगंज इंडस्ट्रियल एरिया में मेसर्स नीलेश ऑयल्स के खिलाफ धारा 420, 467, 468,471 और 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था। मेसर्स नीलेश ऑयल्स द्वारा बैल कोल्हू और अन्य मार्का का लेबल लगाकर लखनऊ और आसपास के जिलों में सरसो का तेल बेचा जा रहा था।

जांच में यह तथ्य भी सामने आए थे कि मेसर्स नीलेश ऑयलस के प्रोपराइटर कनकहरि अग्रवाल ने नगर निगम से 14 अप्रैल 2005 को खाद्य लाइसेंस (पुस्तक संख्या 13956 क्रम संख्या 52) बनवाया था, जो 31 मार्च 2006 को तक ही वैध था। 

अब ईओडब्ल्यू के निरीक्षक दिनेश कुमार ने नगर आयुक्त को एक सप्ताह पहले पत्र भेजकर यह जानकारी मांगी है कि मेसर्स नीलेश ऑयल्स ने लाइसेंस बनाने के लिए जो अभिलेख दिए थे, उसमे फर्म का पंजीकरण सरसों के तेल की बिक्री और पैकिंग के लिए कराया गया था तो क्या उसके लिए तेल के ब्रांड के लिए भी पंजीयन कराना अवश्य है अथवा नहीं। 

टैंकर से तेल आया और फिर से किसी ब्रांड के नाम से बेचा जा रहा है। ऐशबाग में तो कई टैंकरों में भरकर सरसो का तेल आता है, जिसे डिब्बे में भरकर किसी नामचीन कंपनी का लेबल लगाकर बाजार में उतार दिया जाता है और लोग ब्रांड का तेल समझकर खरीद लेते हैं। 

Posted By: Anurag Gupta

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस