लखनऊ, (दुर्गा शर्मा)। अपनों के प्यार, देखभाल और अपनी जिजिविषा के बूते 96 साल की सहारा स्टेट, जानकीपुरम निवासी शांता भटनागर ने कोरोना को चित किया। घर पर शांता भटनागर के साथ उनकी सबसे छोटी बेटी मृदुला भटनागर रहती हैं। बाकी बेटे और बेटियां भी घर के आस-पास ही रहते हैं। बेटे, बेटियों, पोती और नाती ने मिलकर घर पर ही शांता भटनागर को स्वस्थ किया। 15 दिन पहले शांता भटनागर को पहले बुखार और फिर खांसी होने लगी। टेस्ट कराया तो रिपोर्ट पाॅजिटिव आई। बेटी मृदुला की रिपोर्ट भी पाॅजिटिव आई। दोनों होम आइसोलेशन में रहे। इस दौरान बाकी परिवारीजन ने सतर्कता के साथ दोनों के खाने-पीने, दवाइयों आदि का प्रबंध किया और अब दोनों ही बिल्कुल स्वस्थ हैं। शांता भटनागर का आॅक्सीजन लेवल 89 तक भी पहुंचा, पर अब उनका ऑक्सीजन लेवल 99 है।

केजीएमयू के डीपीएमआर में सीनियर प्रोस्थेटिस्ट एवं प्रभारी वर्कशाॅप शगुन सिंह ने दादी की दवाइयों और डाइट की जिम्मेदारी संभाली। शगुन बताती हैं, हम दादी से मिल तो नहीं पा रहे थे, पर मोबाइल हमारे बीच का सेतु बना। वह हमें ब्रीथिंग एक्सरसाइज के तौर पर ओम का उच्चारण और राधे-राधे का जाप व्वाइस रिकाॅर्ड के जरिए भेजतीं। संक्रमित होने के बाद भी दादी ने खुद को पहले की तरह ही सक्रिय रखा। पहले की तरह ही वह सुबह पांच बजे उठ जातीं। गर्म पानी से स्नान करतीं। उन्हें कई बार बताना पड़ता, पर वह जैसा कहा जाता वैसा ही करती जातीं। जितनी बार कफ आता, वह उसे थूकने जातीं। दवाई भी दी, फिर धीरे-धीरे उनका बलगम निकल गया।

इन बातों का रखा ख्याल

  • घर पर भी नियमित मास्क पहना। शारीरिक स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा। जितनी बार बाथरूम जातीं, गर्म पानी से हाथ-पैर धोतीं।
  • नियमित रूप से गरारा करतीं, भाप लेतीं। ओम का उच्चारण करतीं। जितनी बार कफ आता, उसे निगलने की बजाए तुरंत थूक देतीं।
  • शरीर को खूब चलाया। आलस नहीं किया।
  • अजवाइन पानी, नींबू पानी और तुलसी पत्ते का पानी नियमित तौर पर पीया।
  • वह लिक्विड डाइट ही ले पा रही थीं। दलिया, मूंग की दाल, दाल का पानी, लौकी का जूस और दूध में सूजी डालकर दिया गया।
  • अदरक और लहसून का पेस्ट खाने में मिलाकर दिया गया।

'हमें तब तक कोई नहीं हरा सकता, जब तक हम खुद हार न मान लें। संक्रमित होने के बाद मैंने किसी भी तरह खुद पर नकारात्मक सोच को हावी नहीं होने दिया। दवाइयां भी लीं, साथ में मन-मस्तिष्क के लिए जरूरी सकारात्मक सोच की खुराक कभी नहीं छोड़ा। मैंने पहले दिन से ही निश्चय कर लिया था कि कोरोना को हराना ही है।    - शांता भटनागर