लखनऊ, जेएनएन। देश की छात्राओं को शीघ्र ही 'स्टेम' शिक्षा मिलेगी। इसमें उन्हें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग व गणित का ज्ञान दिया जाएगा। केंद्र सरकार शीघ्र ही योजना को हरी झंडी दिखा सकती है। 

स्वास्थ्य मंत्री व प्रदेश सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह बुधवार को केजीएमयू में 'किशोरियों पर मातृत्व बोझ' कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने किशोरियों के स्वास्थ्य में शिक्षा का अहम रोल बताया। मंत्री ने कहा कि सीएसआर फंड से छात्राओं को स्टेम शिक्षा दी जाएगी। केंद्र सरकार को आइबीएम कंपनी ने स्टेम शिक्षा का प्रस्ताव भेजा है। इस पर मंथन चल रहा है। प्रथम बैच में यूपी की 50 हजार छात्राओं को स्टेम शिक्षा के तहत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियङ्क्षरग व गणित का ज्ञान दिया जाएगा। इसमें कक्षा आठ से 12 तक की छात्राओं का चयन किया जाएगा। वहीं इस शिक्षा का कोई शुल्क नहीं होगा। 

कानपुर में सफल हुआ तो लखनऊ में इवनिंग ओपीडी

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पतालों में इवनिंग ओपीडी पर विचार चल रहा है। पहले कानपुर में शुरू करने पर मंथन चल रहा है। यदि सफल हुआ तो लखनऊ के अस्पतालों में भी यह सुविधा शुरू होगी। फिलहाल अभी इसका प्लान तैयार किया जा रहा है। 


बाल विवाह घातक

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बाल विवाह घातक है। बेटियों का कम उम्र में बाल विवाह मातृ-शिशु दोनों मृत्युदर को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में लोगों को शिक्षित करने की जरूरत है कि वह 18 वर्ष से कम उम्र में बेटी की शादी न करें। इसमें वह पति द्वारा छोड़े जाने पर कानूनी अधिकार से भी वंचित हो जाती हैं। इस दौरान रेस्परेटरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में एनएचएम के डॉ. मनोज कुमार आदि मौजूद रहे।

स्टेम शिक्षा क्या है

एसटीईएम का संक्षिप्त शब्द स्टेम है। जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित संबंधी विषयों को संदर्भित करता है, जो छात्राएं स्वास्थ्य व इंजीनियङ्क्षरग आदि क्षेत्रों में अपना कॅरियर बनाना चाहती हैं। उन्हें यह कोर्स लाभकारी साबित होगा। वह अध्ययन कर अपने व्यवसायिक लक्ष्यों को हासिल कर सकेंगी।

Posted By: Anurag Gupta

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