लखनऊ [पुलक त्रिपाठी]। Positive India: मजहब की आड़ में कोरोना का खतरा बढ़ाने वाले जमाती हों या फिर पुलिस और डॉक्टरों पर पथराव करने वाले उत्पाती। शहर में रसखान की परंपरा अलंबरदार बिटिया इनकी करतूतों से बहुत खफा है। सूरदास की राह पर बढ़ती यह बिटिया एक ओर जहां 'ओ पालनहारे...' गाकर श्रीकृष्ण से कोरोना के खात्मे की गुहार लगा रही है तो वहीं जमातियों और उत्पातियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी कर रही है। 

कैंपवेल रोड बालागंज निवासी 28 वर्षीय शबीना सूरदास की तरह दृष्टि दिव्यांग हैं और कृष्ण भक्त भी। वह कहती हैं कि कलाकारों पर भगवान की विशेष कृपा रहती है। रसखान की तरह श्रीकृष्ण का गुणगान करने वाली इस मुस्लिम युवती को आस है कि श्रीकृष्ण जल्द ही देश पर मंडरा रहे कोरोना के खतरे को खत्म करेंगे। इसी भावना के साथ शबीना ने अपना गाया गीत 'ओ पालनहारे...' यूट्यूब पर पोस्ट किया है। इसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं। मुस्लिम होकर भजन गाने के सवाल पर वह कहती हैं कि मंदिर भी मेरा है और मस्जिद भी। गीता और कुरान मेरे लिए एक समान है। वह कहती हैं कि मैंने ईश्वर को महसूस किया है। हमारे देश को इस बीमारी से वही बचा सकते हैं। देशभक्त शबीना कोरोना का संक्रमण फैलाने वाले जमातियों सहित चिकित्सकों पर पत्थर बरसाने वाले उत्पातियों पर बरस पड़ती हैं। शबीना का कहना है कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं, उन्हें कड़े से कड़ा दंड मिलना चाहिए। देश पर आए इस संकट में जो लोग भी आग में घी डालने का काम कर रहे हैं, वे न तो ङ्क्षहदू हैं और न ही मुस्लिम। कभी कोई भारतीय अपने देश को संकट में डाल ही नहीं सकता। 

राज्यपाल और राष्ट्रपति कर चुके हैं सम्मानित

महज दो वर्ष में एक दुर्घटना में दोनों आंखे खो चुकी शबीना को बचपन से ही गाने का शौक था। दिव्यांग बेटी की जिंदगी में खुशियों का रंग भरने के लिए पिता ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। शुरुआत में एकल गायन किया। फिर स्टेज परफॉरमेंस दिया। इसके बाद शबीना के कदम आगे बढ़ते गए और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। शबीना ने इलाहाबाद, रायबरेली, लखनऊ समेत प्रदेश के कई अन्य जिलों में अपने भजन गायन का जलवा बिखेरा है। अद्वितीय प्रतिभा के बलबूते ही शबीना को वर्ष 2018 में राज्यपाल द्वारा पुरस्कार से नवाजा गया। इतना ही नहीं शबीना को राज्य स्तरीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। दिसंबर 2019 में शबीना राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पुरस्कृत किया गया था।

 

Posted By: Divyansh Rastogi

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