लखनऊ, जेएनएन। तारीख पर तारीख देने के बाद भी प्रदेश के विभिन्न जिलों में 20,000 से अधिक डीएल अब तक आवेदकों के पास नहीं पहुंच पाए हैं। हाल यह है कि आवेदक लाइसेंस पाने के लिए कभी आरटीओ तो कभी परिवहन आयुक्त कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। पिछले करीब दो माह से हर बार आवेदकों को पंद्रह दिन की मोहलत देकर विदा कर दिया जाता है।

आवेदकों का कहना है कि पहली बार बताया गया कि आरटीओ से पंद्रह दिन बाद लाइसेंस मिल जाएगा। वापस संबंधित जिलों के आरटीओ को भेजे जा रहे हैं। वहां अपनी आइडी प्रूफ प्रस्तुत कर अपना डीएल जिले के कार्यालयों से प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन अब तक नहीं मिला है। अब बताया जा रहा है कि शासन में एक प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। जल्द ही समस्या का स्थाई हल हो जाएगा। एक माह बीत चुका है, लेकिन डीएल अब तक नहीं मिल पाया। अब फिर नई दिक्कत बताई जा रही है। आखिर लाइसेंस के लिए जाएं तो जाएं कहां?


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औसतन करीब पचास डीएल रोज हो रहे हैं वापस

दलालों की उगाही से आवेदकों को बचाने के लिए और डीएल सीधे आवेदकों तक पहुंचाने के लिए विभाग ने परिवहन आयुक्त कार्यालय से एक केंद्रीयकृत व्यवस्था शुरू की गई। इसके तहत हर जिले के डीएल प्रिंटिंग की व्यवस्था मुख्यालय से सुनिश्चित कराई गई। यहीं से डीएल सीधे संबंधित व्यक्ति के घर पर भेजे जाने की व्यवस्था तय की गई, लेकिन गलत पता, मोबाइल नंबर गलत भरे जाने, पिन कोड समेत तमाम गलतियों की वजह से करीब एक प्रतिशत लाइसेंस की वापसी बराबर बनी रही। हाल यह है कि प्रतिदिन करीब 10,000 डीएल मुख्यालय से डिस्पैच किए जाते हैं। इनमें से 50 डीएल औसतन रोज प्रदेश के विभिन्न जिलों से लौट रहे हैं। 

क्या कहते हैं अफसर?

आईटी अपर परिवहन आयुक्त विनय कुमार सिंह बताते हैं कि लगभग 99 प्रतिशत तक डीएल आवेदकों को पहुंचाए जा चुके हैं। कुछ में पता, पिनकोड और सबसे बड़ी बात मोबाइल नंबर किसी दूसरे का भरा गया है जिससे उन तक सूचना नहीं पहुंचाई जा पा रही है। फिर भी प्रयास किया जा रहे हैं कि सभी तक डीएल पहुंच जाएं। इसके लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। प्रयास होगा कि वापसी शून्य हो।

Posted By: Divyansh Rastogi

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