लखनऊ (जेएनएन)। भाजपा के खिलाफ विपक्षी गठबंधन की मुख्य धुरी बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने शनिवार शाम अचानक ही राजधानी पहुंचकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी। भाजपा के एससी-एसटी कार्ड, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर रावण की रिहाई आदि घटनाओं के मद्देनजर मायावती की लखनऊ यात्रा को राजनीतिक नजरिए से अहम माना जा रहा है। रविवार को वह पार्टी की चुनावी रणनीति का भी संकेत दे सकती हैं। 

आवास में ही पत्रकारों से होगी बात

अपने 13 माल एवेन्यू स्थित सरकारी आवास को कांशीराम यादगार विश्राम स्थल के रूप में परिवर्तित कर सरकार को सौंपने के बाद से मायावती दिल्ली में ही रही हैं। वहीं से वह पार्टी के दिशानिर्देश भी जारी करती रही हैं। शनिवार को वह यहां आकर अपने निजी आवास 9 माल एवेन्यू में रुकी हैैं। सरकारी बंगला छोडऩे के बाद इसी आवास में उन्होंने अपना सामान शिफ्ट कराया था। रविवार को वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से वार्ता के साथ ही अपने नए आवास में ही पत्रकारों से भी वार्ता करेंगी।

पार्टी के चुनावी रुख पर इशारा संभव

पार्टी सूत्रों के अनुसार वह मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश की पार्टी के रुख की ओर इशारा कर सकती हैं। हालांकि मायावती ने पहले ही यह संकेत दे रखे हैं कि लोकसभा चुनाव में बसपा का सपा के साथ गठबंधन हो सकता है लेकिन, अभी भी इसको लेकर असमंजस बना हुआ है। इस बीच शिवपाल सिंह यादव के सेक्युलर मोर्चा ने उनसे बातचीत के विकल्प खुले रखने की बात कहकर प्रस्तावित गठबंधन में एक नया एंगल ला दिया है। यही वजह है कि उनके आगमन से राजनीतिक रूप से सरगर्मी बढ़ गई है। 

 

Posted By: Nawal Mishra