लखनऊ। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में सड़कों का जाल बिछेगा और पुरानी टूटी-फूटी सड़कें बेहतर की जाएंगी। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की संपत्ति बंटवारे की प्रक्रिया 15 दिन के भीतर पूरी होगी। छत्तीसगढ़ व अन्य नक्सल प्रभावित राज्यों को केंद्र सरकार सहयोग और संसाधान उपलब्ध कराएगी। आज राजधानी में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बीसवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए परिषद अध्यक्ष व केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इन फैसलों पर मुहर लगाई। इस बैठक में पचास फीसद मांगों पर सहमति बन गयी है। बैठक में परिषद के सदस्य राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत तथा इन राज्यों के मुख्य सचिव तथा अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए। राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्रियों को भरोसा दिया है कि केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय कर विकास की गति तेज की जाएगी। शुरुआत में छत्तीसगढ़ सरकार ने सड़कों की संख्या बढ़ाने और इसकी बेहतरी का प्रस्ताव रखा। उत्तर और मध्यप्रदेश ने भी इस प्रस्ताव से खुद को जोड़ा। गृह मंत्री ने भरोसा दिया कि सड़कों की बेहतरी के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्रालय को जिम्मेदारी दी जायेगी। राजनाथ ने उत्तर प्रदेश की मेजबानी में बैठक की सफलता के लिए अखिलेश यादव को धन्यवाद ज्ञापित किया। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और परिषद के राज्य सचिव आलोक रंजन, परिषद के केंद्रीय सचिव एचके दास, गृह मंत्री के सलाहकार हरीकृष्ण पालीवाल समेत कई प्रमुख अधिकारियों ने पत्रकारों को बैठक का ब्योरा दिया।

उत्तर प्रदेश में यह बैठक आठ जनवरी 1992 के बाद करीब 23 साल बाद सम्पन्न हुई है जबकि पिछली बैठक 2010 में दिल्ली में हुई थी। परिषद के उपाध्यक्ष और मेजबान की भूमिका में अखिलेश यादव ने राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय पर जोर दिया। कुल 35 बिन्दुओं पर बैठक में विमर्श हुआ। ये बिन्दु अक्टूबर 2014 में स्टैंडिंग कौंसिल ने निर्धारित किए थे।


परीक्षा के लिए नए विधान पर जोर

मुफ्त और अनिवार्य बाल अधिकार शिक्षा अधिनियम 2009 के नियमों में संशोधन की मांग उठी। कक्षा आठ तक परीक्षा न कराये जाने और मुफ्त शिक्षा का प्रावधान है। परिषद में यह मांग उठी कि बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा हो लेकिन उनके मूल्यांकन की भी व्यवस्था होनी चाहिए।


नक्सल उन्मूलन को मांगी धनराशि

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने नक्सल उन्मूलन के लिए पूर्वोत्तर राज्यों के समान पैटर्न पर केंद्र की 90 और राज्य के दस प्रतिशत आर्थिक योगदान की मांग रखी। 60 और 40 के अनुपात में पुलिस बल आधुनिकीकरण के लिए सहयोग मांगा। उन्होंने प्रदेश में तैनात होने वाले केंद्रीय बलों का खर्च केंद्र सरकार द्वारा उठाने की अपील की। अन्य राज्यों ने इसका समर्थन किया।


पर्यावरण अनापत्ति संशोधन की मांग

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पर्यावरण अनापत्ति जारी करने की प्रक्रिया में संशोधन की मांग रखी। वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधानों से विकास परियोजनाओं को मंजूरी देने में आ रही कठिनाइयों को हटाने की मांग की। मुख्यमंत्री का तर्क था कि इस अधिनियम में स्थानीय विकास और वन भूमि के वाणिज्यिक उपयोग की जरूरत के बीच अंतर किया जाए। सभी राज्यों के मुख्यमंत्री ने इससे सहमति जताई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके यहां तो 70 फीसद भूमि इस अधिनियम से प्रभावित है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अधिनियम के तहत अन्य प्रयोक्ता एजेंसियों की परियोजनाओं के लिए मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा।


भूजल पुनर्भरण में नई नीति की मांग

उत्तर प्रदेश में स्थित गंगा बेसिन में अपार भौगोलिक संसाधन उपलब्ध हैं तथा राज्य की जलभूत प्रणाली देश की सबसे बड़ी जलभूत प्रणालियों में एक है। यहां की लगभग 70 फीसद खेती भौगोलिक जल संसाधनों पर प्राथमिक रूप से निर्भर है। भौगोलिक जल पर अत्यधिक दबाव के कारण कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में कमी आयी है। इस दिशा में नई नीति लाने की मांग की गयी ।


यूपी-उत्तराखंड बंटवारे को समिति

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की परिसंपत्तियों के बंटवारे के लिए दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की एक समिति बनाने का फैसला हुआ। इस समिति को 15 दिन के भीतर निपटारे के निर्देश दिए गए हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने जल विद्युत परियोजनाओं के विकास, भागीरथी इको सेंसिटिव जोन अधिसूचना में विसंगतियां और जामरानी बांध परियोजना पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच समझौते का ज्ञापन भी प्रस्तुत किया।


निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं

बैठक में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड से निर्यात की दिशा में योगदान पर चर्चा हुई। देश के सकल घरेलू उत्पाद में इन राज्यों का योगदान कम है। इन राज्यों में निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार हुआ।


अप्रैल तक खाद्य सुरक्षा पर कार्रवाई

मध्य प्रदेश ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के कार्यान्वयन से सम्बंधित मुद्दे बैठक में रखे। यह तय हुआ कि इस दिशा में अप्रैल तक राज्य सरकारें अपने स्तर से कार्रवाई करें।


राज्य सरकारों के अपने खाते में धन

पूरक वृक्षारोपण निधि प्रबंधन और आयोजन प्राधिकरण (कैंपा) योजना में राज्य सरकारें अपने खाते में धनराशि जमा कर केंद्र की गाइड लाइन के अनुसार कार्य करें। यह मसला छत्तीसगढ़ सरकार ने उठाया था।


रेल सुविधाएं

उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमीशन कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा रेलवे कर्षण उप स्टेशनों के लिए पारेषण लाइनों के निर्माण पर भी विमर्श हुआ। छत्तीसगढ़ में किरंदुल कोरापुट लाइन पूर्वी तट रेलवे पर कानून और व्यवस्थाओं की समस्याओं के साथ निपटने और रेल रोको आंदोलन के दौरान राज्य की भूमिका, सड़क पर पुल के निर्माण और इसे चालू किए जाने के बाद लेवल क्रासिंग बंद करना तथा नई रेल लाइन की परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण आदि बिन्दुओं पर विचार किया गया।


छत्तीसगढ़ में परिषद की अगली बैठक

अब हर छह माह में परिषद और इसकी स्थायी समिति की बैठकों का आयोजन होगा। अगर 2015 में बैठक हुई तो फिर उत्तर प्रदेश को मेजबानी का अवसर मिलेगा वरना अगली बैठक छत्तीसगढ़ में आयोजित होगी। बैठक में मध्य क्षेत्रीय परिषद के प्रक्रिया के नियमों में संशोधन का भी मुद्दा उठा।


बैठक के महत्वपूर्ण बिन्दु

-छत्तीसगढ़ सरकार ने बाल कल्याण कार्यक्रमों के लिए निधि में वृद्धि की मांग की। अन्य राज्यों का समर्थन।

-छत्तीसगढ़ सरकार ने की रेलवे द्वारा नया रायपुर में नई राजधानी के लिए नई रेल लाइन के पूरा होने के मद्देनजर पुरानी नैरो गेज लाइन की भूमि की वापसी की मांग।

-छत्तीसगढ़ में हवाई अड्डा मूल संरचना सुविधाओं में सुधार। बस्तर में सामुदायिक परिसंपत्तियों के सृजन के लिए मनरेगा का इस्तेमाल। सीएएमपीए निधियों की निर्मुक्ति।

-मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस बलों के आधुनिकीकरण का रखा प्रस्ताव। कारागारों के आधुनिकीकरण योजना पर जोर। धान मिलिंग के लिए दर, भंडारण आदि से संबंधित मुद्दे।

-माडल स्कूल योजना की समीक्षा और इनमें छात्रावास की सुविधा प्रदान करने का प्रस्ताव। नई परिवहन और सड़क सुरक्षा नीति के प्रावधानों पर पुनर्विचार।

-मध्यप्रदेश सरकार ने मांगी गौण खनिज खदानों के लिए पर्यावरण की अनापत्ति की छूट।

Edited By: Dharmendra Pandey