लखनऊ(राज्य ब्यूरो)। मधुमेह की चपेट में आए लोगों या इसके करीब पहुंच गए मरीजों को राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत मुफ्त दवा मिलेगी। बीमारी के बावजूद बेहतर जिंदगी जीने का उन्हें गुर सिखाया जाएगा। इसी वित्तीय वर्ष में 28 जिलों में इस योजना पर अमल होने की उम्मीद है।

राज्य के बड़े शहरों की 10 से 15 फीसद और ग्रामीण क्षेत्र की पांच से आठ फीसद आबादी मधुमेह की चपेट में है। स्वास्थ्य विभाग के सर्वेक्षणों में ये तथ्य उभरने के बाद 'नान कम्यूनिकेबिल डिसीज' का ग्रुप बनाया गया। जिसमें मधुमेह को भी शामिल किया गया था। जिसे कुछ समय पहले प्रयोग के तौर पर आधा दर्जन जिलों के कुछ हिस्सों में लागू किया गया था। जिसके सकारात्मक परिणाम मिलने पर एनआरएचएम की यूपी इकाई ने अब 28 जिलों के मधुमेह रोगियों के इलाज व मुफ्त प्रशिक्षण देने की योजना बनायी है। अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2014-15 के प्रस्ताव में मधुमेह की चपेट में आए लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए सौ करोड़ से अधिक की धनराशि मांगी गयी है।

पहले चालीस-पचास साल की उम्र के बाद ही लोग मधुमेह की चपेट में आते थे। लेकिन अब तीस साल से कम के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। केजीएमसी के मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर व मधुमेह विशेषज्ञ डा.कौसर उस्मान बताते हैं कि ओपीडी में आने वाले मरीजों में दो से तीन फीसद युवा मधुमेह की चपेट में होते हैं। कुछ बीमारी के करीब तक पहुंच गए होते हैं। ऐसे में एनआरएचएम में योजना चलने से लोगों को खासा लाभ होगा।

मधुमेह की भयावहता

- शहरी आबादी में 10 से 15 फीसद लोग मधुमेह की चपेट में है।

-ग्रामीण क्षेत्र की 5 से आठ फीसद आबादी मधुमेह की चपेट में है।

एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स

मधुमेह रोगियों को सही चिकित्सीय परामर्श देने के लिए केन्द्र सरकार की पहल पर एक साल का सर्टिफिकेट इन डायबटीज मैनेजमेंट कोर्स शुरू किया गया था। इस पाठ्यक्रम को पढ़ाने के लिए 60 प्रोफेसरों का चयन किया गया है। यूपी में तकरीबन 14 कालेजों में यह कोर्स चलाया जा रहा है।

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

budget2021