- मुस्लिम बहुल जिलों में बढ़ेगी शिक्षकों की संख्या : पल्लम राजू

- 12वीं योजना में अल्पसंख्यकों के सरोकारों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

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जागरण ब्यूरो, लखनऊ : मंच तो 12वीं पंचवर्षीय योजना की रोशनी में मुसलमानों के सरोकारों पर विमर्श का था। विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भरसक जताने की कोशिश भी की लेकिन किसी का नाम लिए बगैर वह इस मौके पर कौम को सियासी पैगाम देने से नहीं चूके। अन्य पिछड़ा वर्ग कोटे के तहत अल्पसंख्यकों को 4.5 प्रतिशत आरक्षण देने के यूपीए सरकार के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सेहरा किसी और के सर न बंध जाए, इस डर से कुछ लोगों ने इस मसले पर ऐसी गफलत पैदा की कि मामला अटक गया। कौम के बीच अक्सर कोई सियासी विकल्प न होने की दुहाई दिये जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुसलमानों को किसी 'खूंटे' से बंधने की जरूरत नहीं है।

गन्ना संस्थान प्रेक्षागृह में 12वीं योजना के संदर्भ में विदेश मंत्री अल्पसंख्यकों की तरक्की के मसले पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण मिलना चाहिए। आंध्र प्रदेश में उन्हें आरक्षण मिल भी रहा है। सुप्रीम कोर्ट भी मुहर लगा चुका है लेकिन जब हमने इसे उप्र में लागू कराने की कोशिश की तो ऐसी गफलत पैदा की गई जिससे सुप्रीम कोर्ट को एक नया फैसला लेना पड़ा जिससे लगा कि पांच न्यायधीशों का पुराना फैसला गलत हो गया। यह मतभेद बाहर वालों ने नहीं, हमारे घर के अंदर पैदा किया गया। इस डर से कि यदि ऐसा हो गया तो मेरा क्या होगा। चुनाव फिर आ रहा है। यह मतभेद और पैदा किये जाएंगे ताकि गफलत बढ़े।'

जलसे के विशिष्ट अतिथि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री एमएम पल्लम राजू ने कहा कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बच्चे बीच में पढ़ाई न छोड़ें, इसलिए मकतब व मदरसों में भी मिड डे मील योजना शुरू की गई है। 12वीं योजना में देश के 90 अल्पसंख्यक बहुल जिलों में शिक्षकों की संख्या बढ़ायी जाएगी। इन जिलों में मुस्लिम बच्चियों को पढ़ाई का मौका देने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना के तहत छात्रावास बनाये जाएंगे। पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों को शिक्षा की धारा में लाने के लिए नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ ओपेन स्कूलिंग के केंद्रों को सुदृढ़ किया जा रहा है। उच्च शिक्षा में भी मुस्लिम छात्रों का प्रवेश दर बढ़ाने की पुरजोर कोशिश होगी। उप्र कांग्रेस कमेटी की पूर्व अध्यक्ष डॉ.राता बहुगुणा जोशी ने कहा सच्चा कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों पर मनमोहन सिंह सरकार ने पहल कर दी है लेकिन इन सिफारिशों को लागू कराने की 75 प्रतिशत जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।

इस मौके पर केंद्रीय योजना आयोग की सदस्य डॉ.सईदा हमीद ने कहा कि मुसलमानों और गैर-मुस्लिमों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में जो खाई है, 12वीं पंचवर्षीय योजना में उसे पाटने का लक्ष्य तय किया गया है। सभी योजनाओं में अल्पसंख्यको की न्यूनतम हिस्सेदारी 15 फीसदी तय की गई है, उन्हें इसका लाभ उठाना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नदवा कॉलेज के प्राचार्य डॉ.मौलाना सईदुर्रहमान आजमी नदवी ने कहा कि मुसलमानों को कुछ और मांगने की जरूरत नहीं लेकिन हम इंसाफ जरूर मांगेंगे ताकि आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने जेलों में बंद बेकसूर मुस्लिमों को रिहा किये जाने की अपील की।

'सनसनीखेज मुद्दों में न उलझें, तरक्की की सोचें मुस्लिम'

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मौलाना मोहम्मद फजलुर्रहीम मुजद्दी ने मुलसमानों के पिछड़ेपन पर रोशनी डालते हुए कहा कि सिर्फ सात प्रतिशत मुस्लिम उच्च शिक्षा में प्रवेश पाते हैं। माध्यमिक शिक्षा में मुस्लिमों की ड्रॉप आउट दर 54, उच्च माध्यमिक में 60 और स्नातक स्तर पर 61 फीसदी है। उप्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में देश के 53 फीसदी मुसलमान रहते हैं लेकिन इन राज्यों की पुलिस फोर्स में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व मात्र छह फीसदी है। उप्र की प्रांतीय पुलिस सेवा में सिर्फ तीन फीसदी मुस्लिम हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान सनसनीखेज व उत्तेजक मुद्दों में उलझने की बजाय अपनी सामाजिक-आर्थिक तरक्की के लिए कोशिश करें।

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