ललितपुर ब्यूरो: एण्टि भूमाफिया टॉस्क फोर्स गठित होने बावजूद भूमि कब्जाने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे है। पीड़ित व्यक्तियों द्वारा बार-बार शिकायतें करने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। इससे टॉस्क फोर्स प्रभावी नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय स्तर पर की गई शिकायत पर जब पीड़ित को न्याय नहीं मिला, तो उसने मुख्यमन्त्री दरबार में गुहार लगाई है।

कोतवाली अन्तर्गत ग्राम कल्यानपुरा निवासी परमानन्द पुत्र चतरे कुम्हार ने मुख्यमन्त्री सहित उच्चाधिकारियों को पत्र देकर बताया कि भूमिधरी की आराजी नम्बर 1579 रकवा 0.48 हेक्टेअर भूमि रोड किनारे पर स्थित है। इस वजह से उसकी भूमि बेशकीमती सम्पत्ति में आती है। इस भूमि पर विपक्षियों द्वारा जबरन कब्जा कर लिया है और तार बॉड़ी लगा दी और टपरा भी डाल लिया है। गुण्डागर्दी पर किए गए कब्जे में गृहस्थी का सामान लकड़ी आदि भी रख लिया और जानवर आदि बाँध लिए। विरोध करने पर विपक्षियों द्वारा गाली-गलौज कर अपमानित किया गया। वह महीनों से कब्जा हटवाने की गुहार लगाता आ रहा है। तहसील दिवस में भी प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। इससे विपक्षियों के हौसले बुलन्द है। बार-बार प्रार्थनापत्र देने के बाद भी स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई। अब पीड़ित ने मुख्यमंत्री दरबार सहित उच्चाधिकारियों के दरबार में गुहार लगाकर कब्जा हटवाने की माँग की है।

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दलित किसान की भूमि जोतने का आरोप

कोतवाली अन्तर्गत ग्राम कल्याणपुरा के मौजा कंचनपुरा निवासी गम्भीर पुत्र खुनू अहिरवार ने बताया कि आराजी संख्या 862 रकवा 2.15ए पर वर्षाे से कब्जा है और खेती किसानी करता आ रहा है। वर्तमान में भी खेती करता आ रहा है। 24 जून को गाँव के दबंगों ने उसकी भूमि पर टै्रक्टर से जुताई आरम्भ कर दी। पीड़ित की पत्‍‌नी जब 25 जून की सुबह खेत पर पहुँची और विपक्षियों को भूमि जोतते हुए देखा, तो विरोध किया। इस पर दबंगों द्वारा गाली-गलौज शुरू कर दी। पत्‍‌नी के साथ हाथापाई भी की गई। धमकी दी गई कि यदि खेत पर दिखाई दिए, तो जान से मार दिया जाएगा। विपक्षियों की धमकी से पीड़ित दलित किसान भयभीत है। उसने पुलिस की शरण लेते हुए जानमाल रक्षा की गुहार लगाते हुए भूमि को जोतने से रोकने की माँग की है।

Posted By: Jagran