ललितपुर ब्यूरो :

तबादला सीजन में वन महकमे में भी बड़े पैमाने पर स्थानान्तरण की बयार चल रही है। जनपद से एक डिप्टी रेजर व तीन वन दारोगा झाँसी स्थानान्तरित किये गये है। जबकि झाँसी से दो डिप्टी रेजर व दो वन दरोगा का तबादला जनपद के लिए किया गया है। इसके अलावा दो रेजर, दो डिप्टी रेजर व चार वन दरोगा स्थानान्तरण की कतार में है। जल्द ही इनका भी स्थानान्तरण आदेश आने वाला है।

लगभग एक सप्ताह से वन महकमें में तबादलों की बयार चल रही है। डीएफओ गोविन्द शरण का स्थानान्तरण उप वन संरक्षक पद पर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय में हो गया था। वे 16 अगस्त 2017 से जनपद में तैनात थे। उनके स्थान पर डीएफओ महोबा ईश्वर दयाल को जनपद का डीएफओ बना कर भेजा गया था। इसी क्रम में मड़ावरा, गौना, माताटीला, महरौनी के क्षेत्रीय वनाधिकारियों का भी स्थानान्तरण कर दिया गया। अब डिप्टी रेजर व वन दरोगाओं के भी स्थानान्तरण शुरू हो गये हैं। जानकारी के अनुसार डिप्टी रेजर बृजराज सिंह, वन दरोगा हरभजन कुशवाहा, मातादीन व संदीप रविकुल का स्थानान्तरण जनपद झाँसी के लिए किया गया है। इसके अलावा दो रेजर, दो डिप्टी रेजर व चार वन दरोगा स्थानान्तरण की कतार में है। माना जा रहा है कि जल्द ही इनका स्थानान्तरण आदेश आने के बाद इन्हे भी जनपद से रिलीव कर दिया जायेगा। झाँसी जनपद से दो डिप्टी रेजर व दो वन दरोगा भी जनपद के लिए भेजे गये है। इनमें डिप्टी रेजर राजेन्द्र कुमार शुक्ला, श्रीकान्त गुप्ता, वन दरोगा महेन्द्र रजक व हनुमत सिंह शामिल है। डिप्टी रेजर राजेन्द्र कुमार शुक्ला पूर्व में बार रेज में तैनात रह चुके है। इसके बाद एक बार पुन: उनका स्थानान्तरण झाँसी से ललितपुर के लिए किया गया है।

मानक के अनुसार नहीं है वन अफसर व कर्मचारी

इसे विडम्बना नहीं तो और क्या कहेगे कि वन महकमें में आवश्यकता के अनुसार एसडीओ, डिप्टी रेजर, वन दरोगा व वन रक्षकों की तैनाती नहीं की जाती। स्थानीय स्तर पर कई बार उच्चाधिकारियों को कर्मचारियों की कमी के चलते जंगल की सुरक्षा में आ रही परेशानी की बात बतायी जाती है, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिये जाने से समस्या जस की तस बनी हुई है। वहीं कमी के चलते कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ भी बना रहता है।

बुन्देलखण्ड के अंतिम छोर पर स्थित जनपद की भौगोलिक स्थिति जंगली और पठारी है। लगभग 75 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगल की सुरक्षा का जिम्मा वन महकमें के कंधो पर है। इतने बड़े क्षेत्र में फैले जंगल को आठ वन रेजों ललितपुर, गौना, मड़ावरा, बार, जखौरा, महरौनी, तालबेहट व माताटीला में बाटा गया है। इन रेंजों में जंगल को वन बीट व वन ब्लॉक में बाटा गया है। रेज का मुखिया क्षेत्रीय वनाधिकारी (रेजर) होता है, जबकि जंगल के अन्य क्षेत्रों को बाँटकर उनकी सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी डिप्टी रेजर, वन दरोगा व वन रक्षकों की होती है। इसके साथ-साथ दैनिक वेतन भोगी सुरक्षा श्रमिक भी जंगल की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। जनपद में दो उप प्रभाग ललितपुर व महरौनी भी है। इन दो उप प्रभागों की जिम्मेदारी उप प्रभागीय वनाधिकारियों के कंधों पर है। ललितपुर उप प्रभाग के अन्तर्गत ललितपुर, तालबेहट, माताटीला, जखौरा, वन रेंज है, जबकि महरौनी उप प्रभाग के अन्तर्गत महरौनी, बार, मड़ावरा व गौना वन रेंज है। लगभग 8 माह पूर्व उप प्रभागीय वनाधिकारी महरौनी वीके यादव का स्थानान्तरण दुधवा नेशनल पार्क लखीमपुरखीरी कर दिया गया था। तब से उप प्रभागीय वनाधिकारी ललितपुर आरके त्रिपाठी को महरौनी उप प्रभाग की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई थी। शासन ने गत दिवस आरके त्रिपाठी का प्रमोशन गोण्डा के डीएफओ के पद पर कर दिया है, जिसके चलते वे भी यहाँ से रिलीव हो चुके है। उनके रिलीव होने के बाद अब तक दोनों उप प्रभागों में किसी भी उप प्रभागीय वनाधिकारी की तैनाती नहीं की गई है। वन महकमे के मानक के अनुसार यहा वन रक्षकों के 60 पद है, जिनमें से 42 ही इस समय कार्यरत है। 18 वन रक्षकों की भारी कमी है। इसी प्रकार 32 वन दारोगाओं के पद हैं, जबकि यहाँ मात्र 25 वन दारोगा ही तैनात हैं। इसी प्रकार डिप्टी रेजरों के 10 पद हैं, जिनमें से 7 ही इस समय तैनात है। इनमें एक डिप्टी रेजर मुख्यालय स्थित कार्यालय में सेवायें दे रहे हैं।

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डिप्टी रेजर को उड़नदस्ता की जिम्मेदारी

डिप्टी रेजर नरेश कुमार बिदुआ को उड़नदस्ता प्रभारी बनाया गया है। इस टीम में पूर्व की ही तरह वन दरोगा अनूप कुमार श्रीवास्तव, वन रक्षक हृदेशचन्द्र श्रीवास्तव, हनुमत सिंह, तैनात रहेगे। यही नहीं चार पुलिसकर्मी भी इस टीम में शामिल रहेगे। यह टीम अवैध खनन, कटान आदि पर सख्ती से रोक लगाने के लिए छापामारी करेगी।

Posted By: Jagran

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