लखीमपुर के रुद्र प्रताप ने शंघाई वर्ल्डस्किल्स 2026 में बिखेरा जलवा, दुनिया के मंच पर भारत का नाम किया रोशन
लखीमपुर खीरी के किसान पुत्र रुद्र प्रताप ने वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में कंक्रीट कंस्ट्रक्शन वर्क में भारत का प्रतिनिधित्व कर प्रदेश का मान बढ़ाया है।
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किसान के बेटे ने शंघाई में लहराया तिरंगा।
HighLights
रुद्र प्रताप ने वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
कंक्रीट कंस्ट्रक्शन वर्क में अपनी तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें प्रमाणपत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
राकेश मिश्र, लखीमपुर। खेतों में पसीना बहाने वाले किसान के घर से निकले बेटे ने अपने हुनर से शंघाई तक पहचान बनाई। लखीमपुर खीरी के देवीपुरवा निवासी किसान रमेश चंद्र श्रीवास्तव के बेटे रुद्र प्रताप ने वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में कंक्रीट कंस्ट्रक्शन वर्क में भारत का प्रतिनिधित्व कर जिले ही नहीं, उत्तर प्रदेश का मान बढ़ाया है।
साढ़े तीन लाख से अधिक प्रतिभागियों के बीच चयन की कठिन प्रक्रिया से गुजरकर चुने गए 70 प्रतिभागियों में जगह बनाना उनकी तकनीकी दक्षता और मेहनत की कहानी कहता है। चैंपियनशिप भले ही कुछ अंकों से दूर रह गई, लेकिन दुनिया के मंच पर भारत का हुनर प्रदर्शित करना रुद्र की बड़ी उपलब्धि है।
सटीकता ही निर्माण की असली पहचान
रुद्र प्रताप का कार्यक्षेत्र कंक्रीट कंस्ट्रक्शन वर्क है, जिसमें निर्धारित नक्शे के अनुसार शटरिंग, सरिया बांधने और कंक्रीट निर्माण जैसे काम गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के अनुरूप करने होते हैं। खासकर हाईराइज इमारतों के निर्माण में सटीकता की अहमियत और बढ़ जाती है।
रुद्र का कहना है कि ऊंची इमारतों में निर्माण के दौरान माप और तकनीकी मानकों की अनदेखी की कोई गुंजाइश नहीं होती। छोटी-सी चूक भी बड़े नुकसान की वजह बन सकती है। यही वजह है कि वह अपने काम में तकनीकी बारीकियों और सटीकता को प्राथमिकता देते हैं।
पॉलिटेक्निक से वैश्विक मंच तक का सफर
देवीपुरवा के किसान परिवार में पले-बढ़े रुद्र ने चंदौली से पॉलिटेक्निक की पढ़ाई की। इसके बाद वह एक कंपनी से जुड़कर अपने क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने लगे। उनकी प्रतिभा को निखारने में एलएंडटी आईसीएसटीआई, वडनगर में मिले प्रशिक्षण की अहम भूमिका रही। यहां उन्होंने समय सीमा के भीतर तकनीकी कौशल को सटीकता और दक्षता के साथ प्रदर्शित करने का अभ्यास किया। विशेषज्ञ एवं मार्गदर्शक रघुरामन जयरामुलु के निर्देशन में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौती के लिए तैयारी की।
कुछ अंकों से चूके, लेकिन अनुभव बड़ी पूंजी
रुद्र प्रताप बताते हैं कि वह चैंपियनशिप हासिल करने से कुछ अंकों से पीछे रह गए। हालांकि, शंघाई में दुनिया के प्रतिभागियों के बीच काम करना उनके लिए सीखने का बड़ा अवसर रहा। अंतरराष्ट्रीय मानकों, कार्यप्रणाली और प्रतियोगिता की चुनौतियों से रूबरू होकर उनका आत्मविश्वास और पेशेवर समझ मजबूत हुई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को रुद्र प्रताप को प्रमाणपत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता तक पहुंचने वाले रुद्र की उपलब्धि प्रदेश के उन युवाओं के लिए प्रेरक है, जो डिग्री के साथ व्यावहारिक हुनर को अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। उनकी यात्रा संदेश देती है कि मजबूत इरादे, सही प्रशिक्षण और निरंतर मेहनत से गांव की प्रतिभा भी विश्व पटल पर अपनी जगह बना सकती है।
भारत से शंघाई तक का सफर, गोल्ड मेडल से बढ़ाया देश का मान
जिला, स्टेट, नेशनल और रीजनल स्तर की प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया। 27 सितंबर को चीन के शंघाई में आयोजित इंटरनेशनल प्रतियोगिता में प्रतिभाग करना उनके लिए गौरवपूर्ण अनुभव रहा।
भारत से शंघाई तक का सफर संघर्ष, मेहनत और सपनों को साकार करने की प्रेरक कहानी बना। 29 सितंबर को भारत वापसी पर उनकी उपलब्धि चर्चा का विषय बनी। विभिन्न स्तरों पर मिली स्वर्णिम सफलताओं ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी और भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगाईं।
