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लखीमपुर में फीकी पड़ी दीपावली, मोहाना नदी की तेज कटान में समाए आशियाने

Published: Wed, 28 Oct 2026 02:39 PM (IST)

लखीमपुर खीरी के जसनगर और पोहारीबाबा गांवों में मोहाना नदी की तेज कटान से आधा दर्जन घर और तीस एकड़ ...और पढ़ें

तिकुनिया के जसनगर में कटान की चपेट में आए घर

तिकुनिया के जसनगर में कटान की चपेट में आए घर

HighLights

  1. मोहाना नदी की तेज कटान से हाहाकार।

  2. आधा दर्जन घर, तीस एकड़ फसलें बहीं।

  3. ग्रामीण पलायन को मजबूर, प्रशासन पर आरोप।

दिनेश जैन, खैरटिया (लखीमपुर)। तिकुनिया के ग्राम जसनगर व पोहारीबाबा में मोहाना नदी की तेज कटान से आधा दर्जन घर नदी में बह गए। भीषण कटान से तीन दिनों के अंदर तीस एकड़ से अधिक खड़ी धान व गन्ने की फसले कट कर नदी में बह गई। दीपावली का त्यौहार कटान पीड़ितों के लिए मुसीबत लेकर आ गया।

मोहाना नदी का जलस्तर घटने के बाद ग्राम जसनगर व पोहारीबाबा में तेज कटान से हाहाकार मच गया है। तेज कटान की चपेट में आकर राजकुमार, जीवन, संतोष, गोवर्धन, मुनेश, दिनेश का घर नदी में बह गया। कुछ लोगों का कुछ हिस्सा ही शेष रह गया है। तेज कटान से दिवाकर का दो एकड़, सुरेश का सवा तीन एकड़, राजकुमार का चार एकड़ खड़ा धान नदी में समा गया। इसी प्रकार मनजीत व शेरा सिंह सहित कई किसानों का भी धान व गन्ना भी कट कर नदी में बह रहा है।

कटान पीड़ितों ने कहा कि शासन प्रशासन ध्यान देता तो वह लोग बर्बाद नहीं होते। भीषण कटान के चलते ग्रामवासी पलायन करने को मजबूर है। अधिकारी गांव को बचाने के कोई भी उपाय करना नहीं चाहता केवल मुआवजा देने की बात कह कर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। इधर उप जिलाधिकारी निघासन यदुवीर सिंह व तहसीलदार का फोन मिलाया गया फोन नहीं उठने के कारण वार्ता नहीं हो सकी।

सवाल तो यह है कि तहसील प्रशासन के बड़े अधिकारी फोन ही नहीं उठाते हैं तो अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कितनी ईमानदारी से करते होंगे। बजट न होने के अभाव में अब कोई भी बचाव कार्य नहीं किया जा सकता है। बाइस करोड़ की परियोजना बनाकर शासन को भेजी गई है। अगली बरसात से पहले ही ठोस बचाव कार्य पूरा करने का प्रयास है।

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