लखीमपुर में गन्ना पेराई से पहले क्रेशर उद्योग पर संकट, कोल्हुओं पर किसानों की नजर
लखीमपुर में गन्ना पेराई सत्र से पहले क्रेशर उद्योग संकट में है, जिससे किसान चिंतित हैं। संचालकों की मांगें लंबित ...और पढ़ें
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HighLights
गन्ना पेराई से पहले क्रेशर उद्योग पर संकट मंडराया।
किसानों को कोल्हुओं पर कम दाम में गन्ना बेचना पड़ रहा।
ऑनलाइन भुगतान और संचालकों की मांगें बनीं मुख्य बाधा।
संवादसूत्र, निघासन (लखीमपुर)। गन्ना पेराई का सीजन शुरू होने से पहले ही क्रेशर उद्योग पर संकट मंडरा रहा है। क्रेशर बंद रहने की आशंका के बीच किसान गन्ना बेचने को लेकर चिंतित हैं। कोल्हुओं पर खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन वहां बिक्री के लिए किसानों को इंतजार करना पड़ रहा है। संचालकों की मांगें लंबित हैं और आनलाइन भुगतान की व्यवस्था के चलते क्रेशर शुरू करने में दिक्कतें आ रही हैं।
किसानों का कहना है कि क्रेशर बंद होने से कोल्हू संचालकों को फायदा हो सकता है, जबकि उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा। किसान रणधीर सिंह के मुताबिक, सरकार ने गन्ने का भाव 400 रुपये तय किया है, लेकिन कोल्हुओं पर किसानों को कम दाम में गन्ना बेचना पड़ रहा है। क्रेशर में सरकारी भाव से कम कीमत मिलने के बावजूद नकद भुगतान से किसानों के जरूरी काम हो जाते हैं। आनलाइन भुगतान में रकम मिलने में दो से तीन दिन लगते हैं।
निघासन के किसान मोनू दीक्षित ने कहा कि क्षेत्र में गन्ने की पैदावार अधिक है और छोटे किसानों के लिए क्रेशर सहारा हैं। इनके बंद होने पर किसानों को गन्ना बेचने के लिए भटकना पड़ सकता है। बजरंग शुगर इंडस्ट्रीज के संचालक सुधीर कपूर ने बताया कि गंधक महंगा है। नकद भुगतान की प्रक्रिया खत्म होने से गन्ना खरीद और पेराई में दिक्कतें आ रही हैं। फिलहाल क्रेशर शुरू होने की उम्मीद नहीं है।
बंद होने की कगार पर बताए गए क्रेशर
श्री गणेश शुगर इंडस्ट्रीज (दुबहा), श्री बजरंग शुगर इंडस्ट्रीज (लुधौरी), श्री बाला जी शुगर इंडस्ट्रीज (चूरा टांडा), धालीवाल शुगर इंडस्ट्रीज (तकियापुरवा) और सिसैया क्रेशर (निघासन)।
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